व्यक्तित्व रस मिटाता है विपत्तियां
ज्योतिषाचार्य डॉ. सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री के अनुसार हमारे व्यक्तित्व में जिस बात का रस भरा होगा, उसके छींटे हमसे मिलने वालों पर गिरेंगे ही। लंका प्रवेश पर हनुमानजी व लंकनी का वार्तालाप उन्हें लंका प्रवेश के लिए एक विचार देती है। वह कहती है कि श्रीरघुनाथजी को ह्रïदय में रखकर नगर में प्रवेश करते हुए सब काम कीजिए।
विपत्तियों को छोटी मान लेना ही उन पर विजय जैसा है। इस विचार के चलते हनुमानजी ने दो कार्य किए पहला श्रीराम को ह्रïदय में रखा और दूसरा प्रसन्न रहे। इसी कारण हनुमानजी की उपस्थिति मात्र से लंकनी के विचार भी दिव्य हो गए। अर्थात्ï हम अपनी भीतरी स्थिति, शक्ति को जितना पुनीत रखेंगे, बाहर का वातावरण उतना ही शुभ होता चला जाएगा।
कर्मचारी को निर्णय स्वतंत्रता
आमतौर पर यह होता है कि दफ्तर के सारे निर्णय बॉस लेता है, कर्मचारी केवल उसकी प्लानिंग पर काम करते हैं। ऐसे में वे न तो कोई जिम्मेदारी लेते हैं और अगर काम नहीं हो रहा है या बिगड़ रहा है तो भी सलाह नहीं देते। अच्छा मैनेजर वह होता है जो अपने कर्मचारियों को काम के साथ निर्णय लेने की आजादी भी दे। तभी कर्मचारी ज्यादा जिम्मेदारी से काम करेंगे और निर्णय स्वतंत्रता के चलते परिणाम निश्चित ही अच्छे मिलेंगे।