
Nashik Road Accident: महाराष्ट्र के नासिक में मुंबई-आगरा हाईवे पर राणेनगर फ्लाईओवर के पास हुए भीषण सड़क हादसे में 31 वर्षीय महिला वकील शीतल नरुले की मौत हो गई। शुक्रवार सुबह एक कंटेनर ट्रेलर ने उनकी दोपहिया गाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में वह ट्रक के पहिए के नीचे आ गईं और मौके पर ही उनकी जान चली गई। बताया जा रहा है कि शीतल ने परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए वकालत के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया था। लेकिन इस अचानक हुए हादसे से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पीछे पति, और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है। 8 साल का मासूम हमेशा पूछ रहा है कि मम्मी वापस कब आयेगी। लेकिन उसके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है।
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे शीतल नरुले अपनी स्कूटी से जा रही थीं। तभी फ्लाईओवर पर द्वारका की दिशा में जा रहे एक कंटेनर ट्रेलर ने उनकी स्कूटी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर के बाद शीतल सड़क पर गिर गईं और कंटेनर का पहिया उनके सिर के ऊपर से गुजर गया। इस भीषण हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद अंबड पुलिस ने कंटेनर जब्त कर लिया और मामला दर्ज किया है।
शीतल अपने पीछे पति दीपक, आठ साल के बेटे, माता-पिता और सास-ससुर को छोड़ गई हैं।
नासिक के सिडको इलाके में परिवार के साथ रहने वाली शीतल के पति दीपक रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं। पति के काम में मदद करते हुए शीतल की रुचि कानून के क्षेत्र में बढ़ी। परिवार और घर की जिम्मेदारियां निभाने के साथ उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की। पति ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। 2024 में कानून की डिग्री हासिल करने के बाद शीतल ने प्रैक्टिस शुरू की।
कुछ महीने पहले ही उन्होंने नासिक के पाथर्डी फाटा स्थित दामोदर चौक में अपना कार्यालय शुरू किया था। यह उनके पेशेवर जीवन की एक नई शुरुआत थी। वह अपने छोटे बेटे की परवरिश करने के साथ वकालत करती थीं और पति के कारोबार में भी मदद करती थीं। लेकिन एक 'त्रासदी' ने सब कुछ बदल दिया और उनका सपना अधूरा रह गया।
शीतल का आठ साल का बेटा सेंट फ्रांसिस स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ता है। मां जब घर से बाहर निकलती थीं, तो वह मासूमियत से पूछता था, 'मां, तुम वापस कब आओगी?' उसे उम्मीद रहती थी कि मां काम खत्म करके वापस घर लौटेंगी और उसके साथ समय बिताएगी। लेकिन इस हादसे ने उसकी जिंदगी से मां का साया ही छीन लिया।
बेटे के बेहतर भविष्य के लिए शीतल परिवार और करियर की दोहरी जिम्मेदारी निभा रही थीं। अपना कार्यालय शुरू करने के बाद उन्होंने वकालत में आगे बढ़ने की दिशा में कदम बढ़ाए थे। लेकिन शीतल के अचानक चले जाने से परिवार टूट गया है।
मुंबई-आगरा हाईवे पर राणेनगर फ्लाईओवर के पास हुए इस हादसे ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गरवारे चौक से द्वारका के बीच पिछले एक साल में 15 से अधिक लोगों की मौत हादसे में हुई है। लगातार हो रहे हादसों के कारण इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों में नाराजगी है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। इसी बीच, शीतल नरुले की मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है।