
Sanjay Raut Supreme Court Contempt Case: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट की कथित अवमानना से जुड़े मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को लेकर दिए गए उनके बयान पहले भी दूसरे लोग दे चुके हैं और इस विषय पर कार्यक्रम और सोशल मीडिया पर चर्चाएं भी हो चुकी हैं। उन्होंने केवल उन्हीं बातों को दोहराया, नया कुछ नहीं कहा। राउत ने स्पष्ट किया कि उनका न्यायालय की अवमानना करने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन, यदि अदालत को लगता है कि उनसे अवमानना हुई है, तो वह माफी मांगते हैं।
मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा कि उनकी सुप्रीम कोर्ट और संविधान में पूरी श्रद्धा है। उन्होंने कहा, "हमारे वरिष्ठ वकीलों ने सलाह दी कि यदि अदालत को ऐसा लगता है कि उसके सम्मान को ठेस पहुंची है या अवमानना हुई है, तो माफी मांग लेनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय और भारत के संविधान में मेरी पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा है, इसीलिए मैंने माफी मांगी। हालांकि, अगर माफी के बाद भी नोटिस जारी रहता है या मामला आगे बढ़ता है, तो मैं अदालत में इस केस को लड़ूंगा।"
सांसद संजय राउत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को लेकर जिन बातों का उन्होंने उल्लेख किया, वे पहले भी सार्वजनिक रूप से कही जा चुकी हैं। उन्होंने इस संदर्भ में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया।
राउत के कहा, प्रशांत भूषण ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट के 65 न्यायाधीश मंत्रियों के साथ लंदन गए थे। राउत ने कहा कि इस पोस्ट पर पहले भी प्रतिक्रियाएं आई थी और इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया में चर्चा हुआ, कार्यक्रम भी प्रसारित किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने केवल इन पुरानी चर्चाओं की ओर ध्यान दिलाया था।
संजय राउत ने कहा कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की शिकायत की गई है और उन्हें नोटिस भी जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि उनके वकील ने नोटिस स्वीकार कर लिया है।
राउत ने कहा, "मेरी सुप्रीम कोर्ट और संविधान पर श्रद्धा है, इसलिए मैंने माफी मांगी। लेकिन हमें न्याय चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि माफी मांगने के बावजूद यदि उन्हें नोटिस दिया जाता है या मुकदमे का सामना करना पड़ता है, तो वह कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
इस विवाद के बीच संजय राउत ने शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार वर्षों से चुनाव आयोग और अदालतों के कारण उनका पक्ष अपने अधिकारों से वंचित रहा है।
राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न छीनकर तीसरे पक्ष को दे दिया गया, जिसे चुनाव में इसका लाभ मिला और वह अब भी सत्ता में है। उन्होंने 40 विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि इस पर अब तक फैसला नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि अदालत को इस मामले में निर्णय लेना चाहिए। यह लड़ाई न्याय और पार्टी के अधिकारों के लिए है।
राज्य सभा सांसद संजय राउत ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि देश में 13 करोड़, महाराष्ट्र में 2 करोड़ और मुंबई में 65 लाख मतदाताओं को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन मतदाताओं को न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि वह न्यायालय का सम्मान करते हैं और माफी मांग चुके हैं, लेकिन यदि इसके बाद भी उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा, तो वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने जरूरत पड़ने पर जेल जाने की बात भी कही।