
Shaina NC on CJP Protest: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन के 12 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले शिवसेना नेता शाइना एनसी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने का मामला संसद के दायरे में आता है, न कि सड़कों पर प्रदर्शन करने से इसका समाधान होगा। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को कानूनी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने और उससे लोगों की जान को खतरा पैदा होने की स्थिति में सरकार और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर भी शाइना एनसी ने सरकार के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर प्रशासन निवारक कार्रवाई कर सकता है।
विपक्षी इंडिया गठबंधन के 12 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना शिंदे गुट की प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने का मामला देश के संसद का है। सीईसी को सड़क पर प्रदर्शन कर नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि 300 सांसद भी सड़कों पर उतरते हैं, तब भी इस तरह की कार्रवाई संसद के भीतर ही आगे बढ़ाई जा सकती है।
उनके मुताबिक, SIR एक कानूनी प्रक्रिया है। यदि कोई संगठन बिना अनुमति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करता है और उसकी वजह से लोगों की जान को खतरा पैदा होता है, तो सरकार और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर शाइना एनसी ने कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है। बिना अनुमति प्रदर्शन नहीं किया जा सकता और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी के बजाय निवारक कार्रवाई की गई थी। शाइना एनसी ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर पूरी तरफ प्रतिबंध नहीं है, लेकिन प्रदर्शन के कारण आम लोगों को परेशानी होती है, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिरासत में लिए जाने के बाद इसे गिरफ्तारी बताकर हंगामा करता है, तो ऐसी स्थिति में भी कानून के तहत निवारक कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित 'वोट चोरी' के आरोपों से जुड़ा है। कांग्रेस नीत विपक्षी गठबंधन ने 12 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
इस बीच, शनिवार को सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। जहां विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल दल पूरे विरोध प्रदर्शन पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने बताया कि सीजेपी के शीर्ष नेताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद रविवार को उन्हें दिल्ली कैंट स्थित एसईएम (SEM) अदालत में पेश किया गया। जहां उनसे एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50,000 रुपये का जमानती बॉन्ड भरवाया गया। इसके बाद एसईएम अदालत ने तीनों को रिहा कर दिया।