
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा- सीजेपी (Photo: IANS)
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। रविवार को सीजेपी नेताओं ने दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई अब सचमुच शुरू हो गई है। इसे पूरे देश में और बढ़ाया जाएगा।
इस बीच, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, सीजेपी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को करीब 24 घंटे बाद रविवार सुबह रिहा कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने उन्हें इस शर्त पर जमानत दी कि वे एक साल तक शांति भंग करने वाली किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके शामिल नहीं हो सके क्योंकि वह आज अपनी दादी के निधन के चलते घर लौट गए हैं।
सीजेपी ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर दोबारा जंतर-मंतर पर मार्च निकालेंगे और वहीं डटे रहेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने जनता से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सीजेपी नेताओं ने नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। पार्टी नेताओं ने इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी आलोचना की।
CJP नेता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि पिछले 72 घंटों में देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा नहीं होगा। दिल्ली में जिस तरह की परिस्थितियां बनीं, उससे देश की छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी हो गया है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। वह भाजपा के लिए काम कर रहे है। इसलिए सरकार सीईसी ज्ञानेश कुमार को बचाने में जुटी है। इसके लिए सरकार ने खुद अपने लोगों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी है। देश में डर का माहौल बना दिया गया।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया था जबकि अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका दूसरी जगह रखा गया था। उनके फोन जब्त कर लिए गए थे। देश भर में खुली इमरजेंसी जैसी स्थिति है। ऐसे हालात आखिरी बार 1975 में तानाशाही शासन के दौरान थे।
दास ने कहा, "उन्होंने हमें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा था। उन्होंने कहा है कि एक साल तक शांति भंग नहीं होनी चाहिए। शांति तो नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने भंग की है।"
सीजेपी नेता ने दावा किया कि पिछले तीन से चार दिनों में जो हुआ है, उसमें पूरी दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है। 30 से 40 हजार पुलिसवालों को तैनात किया गया है। नक्सलियों से लड़ने वाले वाले बॉर्डर पर तैनात रहने वाले बीएसएफ के जवानों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाया गया है। शहर में भारी पाबंदियां लगा दी गई हैं। यह बहुत बड़ी समस्या पैदा करने जैसा कदम है। सौरव दास ने दावा किया कि भाजपा नीत सरकार का अंत नजदीक है। वह लोगों से झूठ बोल रही है।
बता दें कि सीजेपी का यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। सीजेपी का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर हर हाल में आंदोलन जारी रखेंगे।
Updated on:
11 Oct 2026 04:16 pm
Published on:
11 Oct 2026 03:32 pm
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