मुंबई

सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे आमने-सामने, दोनों शिवसेना गुटों के बीच बढ़ा विवाद

Uddhav Thackeray; महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे आमने-सामने आ गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच उद्धव ठाकरे के बयान पर शिंदे ने पलटवार किया। जानिए शिवसेना के दोनों गुटों के बीच विवाद की वजह।
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Oct 21, 2026
Shiv Sena Political Conflict
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे आमने-सामने, फोटो सोर्स- ANI

Shiv Sena Political Conflict: महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का मुद्दा अब शिवसेना के दोनों गुटों के बीच नए टकराव की वजह बन गया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दशहरा रैली के दौरान इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन और सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयानों ने महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

लोकसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों से शिवसेना में विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुटों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हिंदुत्व, शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा, मराठी और गैर-मराठी मुद्दे, भ्रष्टाचार और मुंबई नगर निगम के कामकाज जैसे विषयों पर दोनों गुट एक-दूसरे को घेरते रहे हैं। अब सत्ता परिवर्तन की बहस ने इस राजनीतिक संघर्ष को नया मोड़ दे दिया है।

2022 में शिवसेना में बगावत के बाद शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई

जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी। शुरुआत में 16 विधायकों के साथ सूरत पहुंचे शिंदे को बाद में पार्टी के 40 विधायकों का समर्थन मिला। इसके बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई और महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे तथा एकनाथ शिंदे के बीच संघर्ष तेज हो गया।

लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने शिंदे गुट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और उसके अधिक सांसद चुने गए। हालांकि, विधानसभा चुनाव में स्थिति बदल गई। शिंदे गुट के 57 विधायक चुने गए, जबकि उद्धव ठाकरे गुट के 20 विधायक ही जीत सके। इसके बाद नगर निगम, नगरपालिका और जिला परिषद चुनावों में भी दोनों गुटों के बीच राजनीतिक मुकाबला जारी रहा। राज्य के कई हिस्सों में शिंदे गुट ने अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि मुंबई में उद्धव ठाकरे गुट की राजनीतिक पकड़ उसके लिए चुनौती बनी रही।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा सत्ता परिवर्तन का विवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान सत्ता परिवर्तन का मुद्दा चर्चा में आया। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस आंदोलन के संदर्भ में सत्ता परिवर्तन की अवधारणा रखी। इसके बाद भाजपा ने विपक्षी INDIA गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधा।

भाजपा नेताओं ने बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और अल्बानिया जैसे देशों में हुए आंदोलनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारत में भी इसी तरह सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान भी सत्ता परिवर्तन को लेकर टिप्पणी की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के अन्य नेताओं ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनावों से होकर ही गुजरता है। भाजपा की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि विपक्ष विदेशी मदद के जरिए सत्ता परिवर्तन करना चाहता है। ये आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।

उद्धव ठाकरे का जवाब, शिंदे ने भी किया पलटवार

भाजपा के आरोपों के बीच उद्धव ठाकरे ने सत्ता परिवर्तन की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि हां, उन्हें सत्ता परिवर्तन चाहिए। उनके इस बयान पर एकनाथ शिंदे ने पलटवार किया और सवाल उठाया कि ठाकरे सत्ता परिवर्तन के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्या वह किसी दूसरे राजनीतिक विचार से प्रभावित है। शिंदे ने कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन केवल चुनावों के माध्यम से हो सकता है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले तीन चुनावों में जनता ने जिन दलों को नकारा है, उन्हें आगामी चुनावों में भी जनता जवाब देगी।

इस तरह सत्ता परिवर्तन का मुद्दा अब केवल भाजपा और विपक्ष के बीच बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिवसेना के दोनों गुटों के बीच भी राजनीतिक टकराव का नया कारण बन गया है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में कितना प्रभाव डालेगा, इस पर सभी की नजर रहेगी।

Updated on:
21 Oct 2026 01:21 pm
Published on:
21 Oct 2026 01:21 pm