
नागौर / पांचौड़ी. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि फर्जी फसल बीमा क्लेम के लिए आरोपियों ने केवल किसानों के नाम और खेतों की जानकारी का ही दुरुपयोग नहीं किया, बल्कि फर्जी दस्तावेज, प्रमाण पत्र और सील तक फर्जी तैयार कर रखी थीं। इस पूरे खेल में बीमा कंपनी से जुड़े कार्मिकों की भूमिका भी सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। गिरोह ने बीमा कंपनी के कार्मिकों के सहयोग से किसानों के हक की राशि फर्जी तरीके से हासिल कर आपस में बांट ली।
पुलिस की ओर से पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपियों रविन्द्र बाजिया और तरुण लोयल के कब्जे से बरामद सामान ने फर्जीवाड़े के तरीके की पोल खोल दी है। आरोपियों के पास से लाडनूं और डेगाना के उपखंड अधिकारियों के नाम से जारी फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र, स्टांप, फसल बीमा फॉर्म तथा कृषि पर्यवेक्षक पुनास के नाम से बनाई गई रबर स्टांप सील बरामद की गई। इससे पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने फसल बीमा कराने और क्लेम उठाने के लिए दस्तावेजों का पूरा फर्जी तंत्र तैयार कर रखा था। फसल बीमा घोटाले को लेकर पांचौड़ी थाने में कई प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों और उनके सहयोगियों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। बरामद फर्जी सील, प्रमाण पत्र और बीमा दस्तावेज इस बात के अहम सबूत माने जा रहे हैं कि यह महज एक-दो मामलों का फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा संगठित नेटवर्क था।
किसान के नाम पर फर्जी बीमा, पैसा दूसरे के खाते में
जांच में सामने आया है कि गिरोह की ओर से दूसरे किसानों के खेतों के खसरा नंबर और अन्य जानकारी जुटाकर उनके नाम से फर्जी तरीके से फसल बीमा कराया जाता था। इसके बाद क्लेम की राशि वास्तविक किसान के खाते में जाने के बजाय गिरोह से जुड़े लोगों के खातों में पहुंचाई जाती थी। इस तरह किसानों को उनके हक की जानकारी तक नहीं होती और बीमा क्लेम की रकम दूसरे लोग हड़प लेते थे।
बीमा कंपनी के कार्मिकों की भूमिका ने बढ़ाई गंभीरता
मामले में बीमा कंपनी के कलस्टर कोऑर्डिनेटर, जिला कोऑर्डिनेटर और तहसील स्तर के कार्मिकों की गिरफ्तारी ने फर्जीवाड़े की गंभीरता और बढ़ा दी है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि गिरोह ने संगठित तरीके से बीमा कंपनी के अंदर तक अपनी पहुंच बनाई हुई थी। कंपनी से जुड़े कार्मिकों की मदद से फर्जी बीमा और क्लेम की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
करोड़ों के घपले की आशंका, कई और चेहरे रडार पर
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक सामने आए मामलों और बरामद दस्तावेजों को देखते हुए फर्जी फसल बीमा क्लेम के नाम पर करोड़ों रुपए के घपले की आशंका है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था और कितने किसानों के नाम पर फर्जी बीमा करवाया गया व कितनी राशि का क्लेम उठाया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में कई अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में हैं तथा कुछ बड़े आरोपियों की तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद फर्जीवाड़े के नेटवर्क और किसानों के हक की राशि की बंदरबांट का बड़ा खुलासा होने की संभावना है।
बीमा कंपनी के कार्मिक ही बन गए किसानों के हक के पैसों के लुटेरे
किसानों को प्राकृतिक आपदा से राहत देने के लिए लागू प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को ही बीमा कंपनी के कार्मिकों और उनके साथियों ने कमाई का जरिया बना लिया। कार्यवाहक एसपी आशाराम चौधरी के निर्देशन में पांचौड़ी थाना पुलिस, एसओजी और डीएसटी की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बीमा कंपनी की मुख्य शृंखला से जुड़े तीन कार्मिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें कलस्टर कोऑर्डिनेटर आदित्य पाटोदिया, जिला कोऑर्डिनेटर अक्षय कुमार और डीडवाना-कुचामन के जिला कोऑर्डिनेटर बिनीत कुमार दुबे शामिल हैं। तीनों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
कंपनी के अंदर से मिल रही थी पूरी मदद
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि गिरोह की मुख्य शृंखला में बीमा कंपनी के ही अलग-अलग स्तर के कार्मिक सामने आए हैं। कलस्टर से लेकर जिला स्तर तक जिम्मेदारी संभालने वाले कार्मिकों की गिरफ्तारी ने फसल बीमा व्यवस्था की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब तक 9 मामले दर्ज, सात आरोपी गिरफ्तार
फर्जी फसल बीमा क्लेम के संबंध में पांचौड़ी थाने में पांच, जबकि जायल, मेड़तारोड़, श्रीबालाजी और रोल थानों में एक-एक प्रकरण दर्ज हुआ है। अब तक कुल सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने नए गिरफ्तार आरोपियों से घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद की है।
ये हैं पुलिस टीम में शामिल
कार्रवाई करने वाली टीम में नागौर वृत्ताधिकारी जिम्मेदारी संभालने वाले आईपीएस जतिन जैन के साथ उनके कार्यालय की टीम, पांचौड़ी थानाधिकारी उर्जाराम, एएसआई मोटाराम, हैड कांस्टेबल लक्ष्मणराम व उनकी टीम, जिला स्पेशल टीम नागौर एवं एसओजी टीम शामिल है।