आयुर्वेद अस्पतालों के बुरे हाल, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा शासन की सुविधा का सही लाभ
नरसिंहपुर. जिले में ४७ आयुर्वेद अस्पताल बिना डॉक्टरों के संचालित किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों का संचालन कांपउंडर सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में जब मरीज इन अस्पतालों में पहुंचते हैं तो इलाज कांपउंडर ही करते हैं और दवाएं देते हैं। बिना डॉक्टर मरीजों का उपचार होने से उन्हें शासन की सुविधा का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में कुल 67 आयुर्वेदिक अस्पताल है। इनमें 63 आयुर्वेदिक औषधालय व 4 होम्यौपेथिक औषधालय शामिल हैं। इन अस्पतालों के लिए कुल डॉक्टरों के 67 पद स्वीकृत है लेकिन जिले में मात्र २० डॉक्टर ही उपलब्ध है। इसी तरह की स्थिति जिला अस्पताल के समीप स्थित आयुष विंग की है। यहां भी स्वीकृत डॉक्टर का पद खाली पड़ा है। पद खाली होने के कारण हीरापुर भटैरा से डॉक्टर कमलेश को यहां अटैच किया गया है जो मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
सालों से खाली पड़े हैं पद
जानकारी के अनुसार जिले में ४७ आयुष डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हुए हैं। लंबे समय से नये डॉक्टरों की पदस्थापना यहां नहीं की गई है। विभाग के अफसरों की मानें तो जिलास्तर पर उन्होंने कईबार पत्राचार किया है और भोपाल में होने वाली बैठकों में भी अवगत कराया है, लेकिन अबतक यहां कमी बनी हुई है।