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अतिक्रमण व नालों की गंदगी से शहर में सींगरी नदी के अस्तित्व पर संकट, प्रोजेक्ट को मंजूरी का इंतजार

कई जगह नदी कुंडो में तब्दील है, इतनी गंदगी जमा है कि दूषित पानी के डबरे भरे हुए हैं। शहरी क्षेत्र में सींगरी नदी की लंबाई करीब 4 से 6 किलोमीटर है।

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नगरीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सींगरी नदी इन दिनों अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। शहर के कई नाले-नालियां सीधे नदी में मिल रही हैं, वहीं घरों का दूषित पानी भी नदी में जा रहा है। साथ ही दोनों तटों पर फैले स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ दिया है।

शहरी क्षेत्र से निकली सींगरी नदी की हालत लंबे समय से बदहाल है।

The Singri River, नरसिंहपुर. नगरीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सींगरी नदी इन दिनों अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। शहर के कई नाले-नालियां सीधे नदी में मिल रही हैं, वहीं घरों का दूषित पानी भी नदी में जा रहा है। साथ ही दोनों तटों पर फैले स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ दिया है। बहाव बाधित है। कई जगह नदी कुंडो में तब्दील है, इतनी गंदगी जमा है कि दूषित पानी के डबरे भरे हुए हैं।
शहरी क्षेत्र में सींगरी नदी की लंबाई करीब 4 से 6 किलोमीटर है। बताया जाता है कि लेकिन नदी सुधार के लिए जो प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, उसमें करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में ही कार्य प्रस्तावित हैं। नगरपालिका प्रशासन ने नदी को संवारने के लिए जो करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से विस्तृत प्रोजेक्ट बनाया है, उसमें पिचिंग, रिटर्निंग वॉल और पाथवे निर्माण जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। इस प्रोजेक्ट की फाइल मंजूरी के लिए भोपाल भेजी गई है।
शहर के भीतर कई छोटे-बड़े नाले सीधे नदी में मिल रहे हैं, जिससे पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। हालात यह हैं कि नदी का पानी पूरी तरह बदबूदार हो गया है और पीने-उपयोग के लायक नहीं है, किनारों पर कचरे का अंबार लगा है। नदी को बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर योजनाएं तो बन रही हैं, लेकिन अब जरूरत है कि इन योजनाओं को जमीन पर उतारा जाए। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सींगरी नदी का भविष्य और भी संकटग्रस्त हो सकता है।
निकाय ने कराया है अतिक्रमण चिन्हांकन
नगरपालिका द्वारा पहले चरण में नदी क्षेत्र का सर्वे कर दोनों किनारों पर फैले स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण का चिन्हांकन कर लिया है, लेकिन इसे हटाने की कार्रवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में बारिश का मौसम नजदीक आने के साथ यह चिंता और बढ़ गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जलभराव और अतिक्रमण हटाना निकाय के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से नदी संरक्षण की बातें हो रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस काम नजर नहीं दिख रहा है। यदि समय रहते नालों के पानी को नदी में जाने से रोका नहीं गया और अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो आने वाले समय में नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
प्रोजेक्ट की प्रमुख बातें
कुल लागत- करीब 15 करोड़ रुपए
प्रस्तावित कार्य- पिचिंग, रिटर्निंग वॉल, पाथवे निर्माण
प्रस्तावित क्षेत्र-लगभग 1 किमी
स्थिति-मंजूरी के लिए भोपाल भेजी गई फाइल

नदी की स्थिति एक नजर में
शहरी क्षेत्र में नदी की लंबाई-4-6 किमी
समस्या-नालों और घरों का दूषित पानी सीधे नदी में
अतिक्रमण-दोनों तटों पर स्थाई-अस्थाई
कार्रवाई- सर्वे और चिन्हांकन पूरा, हटाने की कार्रवाई लंबित

बढ़ सकती है परेशानी
बारिश से पहले अतिक्रमण नहीं हटे तो संकट
जलभराव और गंदगी की स्थिति होगी गंभीर
नदी का बहाव और अधिक प्रभावित होने की आशंका
वर्जन
नदी क्षेत्र में प्रस्तावित कार्यो की फाइल मंजूरी के लिए जा चुकी है, तटीय क्षेत्र में अतिक्रमण का चिन्हांकन अभी पूरा नहीं हुआ है। नदी की सफाई और गहरीकरण के लिए कार्ययोजना अनुसार कार्य होगा। लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वह नदी में कचरा-गंदगी न डालें।
नीलम चौहान, सीएमओ नगरपालिका नरसिंहपुर

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