ancient heritage, जिले की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान रहे प्राचीन नरसिंह मंदिर का स्वरूप जल्द ही बदला हुआ नजर आएगा। लगभग 600 वर्ष पुरानी इस धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य इन दिनों प्रगति पर है। नरसिंह मंदिर समिति ट्रस्ट के तत्वावधान में महाराष्ट्र से आए कारीगरों की टीम मंदिर के जीर्णोद्धार, सुधार और […]
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जिले की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान रहे प्राचीन नरसिंह मंदिर का स्वरूप जल्द ही बदला हुआ नजर आएगा। लगभग 600 वर्ष पुरानी इस धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य इन दिनों प्रगति पर है। नरसिंह मंदिर समिति ट्रस्ट के तत्वावधान में महाराष्ट्र से आए कारीगरों की टीम मंदिर के जीर्णोद्धार, सुधार और रंग.रोगन का कार्य कर रही है।
जिला मुख्यालय में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। आधे शेर और आधे मनुष्य के स्वरूप में भगवान नरसिंह की यह प्रतिमा भक्त प्रहलाद की रक्षा की कथा से जुड़ी हुई है। इतिहासकारों के अनुसार मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में जाट शासक नाथन सिंह द्वारा कराया गया था। मान्यता है कि गर्भगृह में स्थापित मुख्य प्रतिमा स्वयं जाट राजा द्वारा स्थापित की गई थी। भगवान नरसिंह के नाम पर ही नगर का नाम नरसिंहपुर पड़ा, जो इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
समय के साथ मंदिर की संरचना पर उम्र और मौसम का असर दिखने लगा था। इसे देखते हुए नरसिंह मंदिर समिति ट्रस्ट ने मंदिर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का निर्णय लिया। ट्रस्ट के सचिव नीलेश जाट ने बताया कि मंदिर को संवारने के लिए प्रथम चरण में करीब 12 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इस चरण में संरचनात्मक सुधार के साथ.साथ दीवारों, नक्काशी और रंग.रोगन का कार्य किया जा रहा है।
महाराष्ट्र से आए अनुभवी कारीगर पारंपरिक शिल्प कला के अनुसार काम कर रहे हैं। कारीगरों के प्रमुख परमेश्वर ने बताया कि विशेष ध्यान इस बात पर दिया जा रहा है कि मंदिर की मूल स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक स्वरूप से कोई छेड़छाड़ न हो। पुरानी नक्काशियों और पत्थरों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें मजबूती दी जा रही है ताकि मंदिर की पहचान बरकरार रहे।
प्रशासनिक सहयोग
इस कार्य में नरसिंह मंदिर समिति ट्रस्ट के साथ केबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल का सहयोग भी मिल रहा है। उनके सहयोग से कार्य को गति मिली है और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि इससे न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि जिले की सांस्कृतिक पहचान भी सुदृढ़ होगी। साथ ही, मंदिर के संवारे जाने से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।