
Ajit Doval China Visit 2026: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन के बीजिंग जाएंगे। वहां मंगलवार को उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात होगी। दोनों के बीच भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें दौर की बातचीत होगी। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं। दोनों पक्ष सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक में दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति, सीमा क्षेत्रों में स्थिरता और सीमा विवाद से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।
पिछले दौर की बातचीत में दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा विवादित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने की जरूरत पर जोर दिया था। साथ ही सीमा प्रबंधन और सैनिक तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी थी।
भारत और चीन के बीच 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। इसके चलते विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत करीब पांच साल तक आगे नहीं बढ़ सकी।
बातचीत दिसंबर 2024 में फिर शुरू हुई। इसके बाद 23वां दौर दिसंबर 2024 में बीजिंग और 24वां दौर अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुआ था। अब 25वें दौर की बातचीत के लिए डोभाल पहली बार बीजिंग पहुंचेंगे।
अजीत डोभाल और वांग यी की जून 2026 में भी नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी। यह बैठक ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक से इतर हुई थी। दोनों पक्षों ने उस दौरान भारत-चीन संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीधे हवाई संपर्क, वीजा व्यवस्था और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे मामलों में भी गतिविधियां बढ़ी हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर राजनीतिक स्तर से बातचीत के लिए विशेष प्रतिनिधि तंत्र 2003 में बनाया गया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के समाधान की रूपरेखा तलाशना है। अजीत डोभाल भारत की ओर से इस तंत्र के विशेष प्रतिनिधि हैं जबकि चीन की ओर से यह जिम्मेदारी वांग यी के पास है।
25वें दौर की यह बैठक दोनों देशों के बीच सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बातचीत में सीमा विवाद के साथ-साथ दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और भविष्य में उच्चस्तरीय संपर्क को आगे बढ़ाने के रास्तों पर भी चर्चा हो सकती है।