
बिहार के बाहुबली नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से विधानसभा की सदस्यता खत्म करने की मांग उठाए जाने के बाद अब बिहार विधानसभा ने भी इस मामले में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा की ओर से अनंत सिंह को नोटिस जारी किया गया है और उनसे एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है।
जदयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा को पत्र लिखा था। पार्टी ने अपनी मांग के समर्थन में जरूरी साक्ष्य भी सौंपे थे। इसी पत्र के आधार पर विधानसभा ने अनंत सिंह को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
हालांकि, अनंत सिंह बार-बार मीडिया के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं। वह खुलकर कह रहे हैं कि उन्होंने बिहार एमएलसी चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ कोई काम नहीं किया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया है।
अनंत सिंह के खिलाफ जदयू की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर हुए चुनाव के दौरान सामने आई बगावत है। दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू ने अपने मौजूदा विधान पार्षद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था।
लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के पक्ष में प्रचार शुरू कर दिया था। उन्होंने खुले तौर पर नीरज कुमार को हराने की बात कही थी। इससे जदयू नेतृत्व नाराज हो गया।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पहले से ही राजनीतिक खींचतान चल रही थी। अनंत सिंह का आरोप था कि विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनका विरोध किया था। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पटना स्नातक सीट के चुनाव में नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
पटना स्नातक सीट के चुनाव परिणाम में नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। उन्होंने राजद के उम्मीदवार दिलीप कुमार को 4,655 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, अनंत सिंह के समर्थन वाले जन सुराज प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
चुनाव के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अनंत सिंह को मनाने की कोशिश भी की थी। केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह की ओर से भी हस्तक्षेप की चर्चा हुई, लेकिन अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहे।
चुनाव के बाद जदयू ने सख्त कदम उठाते हुए अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अनुशंसा की गई।