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BRICS Summit: पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती या अंदरूनी विभाजन का डर? जानें नई दिल्ली सम्मेलन पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ

India's BRICS presidency 2026: नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा BRICS समिट। क्या यह पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती है या संगठन की अंदरूनी दरार का डर? जानें विशेषज्ञों की राय।
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Sep 10, 2026
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ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी (फोटो-ANI)

BRICS Summit and Western dominance: 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट होने वाला है। दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक GDP के 40 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन में कई देशों के प्रमुख शिरकत करेंगे। इसमें रूस के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्र प्रमुखों के साथ अन्य लोग शामिल हैं।

क्या है इस साल का थीम

1 जनवरी 2026 से शुरू हुई भारत की इस अध्यक्षता का थीम रखा गया है, "बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी।" यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास। भारत ने इसके लिए चार बड़े स्तंभों पर काम किया है। पहला स्तंभ है आर्थिक और संस्थागत मजबूती, ताकि सदस्य देश सप्लाई चेन में रुकावट, महामारी और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपट सकें। दूसरा स्तंभ है नवाचार यानी इनोवेशन, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फिनटेक जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा दिया गया। तीसरा स्तंभ सहयोग का है, जिसके तहत व्यापार सुगमता और नीतिगत तालमेल पर जोर दिया गया। चौथा स्तंभ टिकाऊ विकास का है, जिसमें जलवायु और हरित वित्त जैसे मुद्दे शामिल रहे।

अब 11 पूर्ण सदस्य और 10 पार्टनर देश

BRICS अब सिर्फ एक छोटा समूह नहीं रहा। इसमें फिलहाल 11 पूर्ण सदस्य देश हैं, ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे 10 देश पार्टनर देश के तौर पर जुड़े हैं। इतने बड़े दायरे के साथ यह संगठन वैश्विक व्यापार का करीब 26 फीसदी हिस्सा भी संभालता है।

2006 में हुई थी शुरुआत, अब 20 देशों का कुनबा

इस संगठन की नींव 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रखी गई थी, तब यह सिर्फ BRIC था, यानी ब्राजील, रूस, भारत और चीन। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। 2011 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और यह BRICS बना। इसके बाद जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को पूर्ण सदस्यता मिली, और जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बना।

भारत की यह चौथी बार अध्यक्षता

गौर करने वाली बात यह है कि भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाल रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी यह जिम्मेदारी निभा चुका है। 2021 में भारत ने वर्चुअल तरीके से 13वां शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें 150 से ज्यादा मंत्रिस्तरीय बैठकें हुई थीं और न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को अपनाया गया था। अब 2026 की यह अध्यक्षता उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नए मुद्दों को भी जोड़ रही है।

तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है पूरा ढांचा

संगठन का पूरा काम तीन मुख्य आधारों पर टिका है, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय सहयोग, और सांस्कृतिक तथा जन-जन के बीच संपर्क। समय के साथ इसका दायरा बढ़कर जलवायु नीति, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, कृषि सहयोग और व्यापार जैसे मुद्दों तक फैल गया है। पिछला शिखर सम्मेलन जुलाई 2025 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुआ था, जहां ग्लोबल साउथ सहयोग और AI गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर बात हुई थी। अब सबकी नजरें दिल्ली में होने वाले इस बड़े सम्मेलन पर टिकी हैं।

भारत की भूमिका बदली

बीते कुछ दशकों में भारत की भूमिका वैश्विक पटल पर बदली है। भारत आज दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत का लक्ष्य साल 2030 तक दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यस्था बनाना है। कुछ सालों पहले तक भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने लिए जगह मांगता था, लेकिन आज उसे दुनिया के हर बड़े मंच से बुलावा मिलता है। भारत जब कुछ कहता है तो दुनिया उसे सुनती है।

न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना

ANI से बातचीत के दौरान BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन समीप शास्त्री ने कहा कि शुरुआती वर्षों में जोर स्वाभाविक रूप से इस बात पर था कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा आवाज मिले। जैसे-जैसे BRICS का विकास हुआ, बातचीत का रुख अपनी खुद की व्यवस्थाएं बनाने की ओर मुड़ गया। उन्होंने कहा कि न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना इसी दिशा में एक अहम कदम थी।

उन्होंने आगे कहा कि आज भारत के पास अपना खासा अनुभव है, चाहे वह डिजिटल पेमेंट्स हो, फाइनेंशियल इनक्लूजन हो, स्टार्टअप्स हों, रिन्यूबल एनर्जी हो, या सप्लाई चेन की मजबूती हो। भारत अब सिर्फ यह नहीं पूछ रहा कि वैश्विक व्यवस्था में क्या बदलाव होने चाहिए, बल्कि वह यह भी बता पाने की स्थिति में है। शास्त्री ने यह भी जोड़ा कि इस गठबंधन के भीतर आदान-प्रदान एकतरफा नहीं, बल्कि दोतरफा प्रक्रिया बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म्स ने दिखाया है कि तकनीक किस तरह लाखों लोगों को औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ सकती है।

ब्रिक्स की बड़ी महत्वाकांक्षाएं बढ़ा रही हैं परेशानी

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के एक विशिष्ट फेलो और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जाने माने विशेषज्ञ सी राजा मोहन ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि ब्रिक्स छोटी चीजों का मंच हो सकता है, लेकिन उसकी बड़ी महात्वकांक्षाओं ने समस्याएं बढ़ा रही हैं। उसके विस्तार ने उसे कम सुसंगत बना दिया है। गुटनिरपेक्ष और इजरायली कार्रवाइयों की निंदा ने उसे जटिल बना दिया है।

सी राजा मोहन ने अपने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध की वजह से संयुक्त अरब अमीरात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ब्रिक्स समूह में शामिल देश UAE और ईरान के बीच विश्वास की गहरी खाई पैदा हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यक्तिगत कूटनीति के जरिए संबंध सुधारना चाहते हैं। इससे “G3” (अमेरिका-रूस-चीन) की संभावना की चर्चा हो रही है, जो BRICS की प्रासंगिकता पर सवाल खड़ा कर सकती है। यूरोपीय और एशियाई सहयोगी इस बात से चिंतित हैं कि मास्को या बीजिंग के साथ किसी समझौते से उनकी सुरक्षा कमजोर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए आंतरिक सुधार और त्वरित आर्थिक विकास की प्राथमिकता है। दिल्ली को अपने बहुपक्षीय विकल्पों को भ्रमित करना बंद करना चाहिए। ब्राजील, यूरोप, जापान, कोरिया और अन्य लोगों के साथ बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देना चाहिए। दिल्ली को अपने राजनयिक विकल्पों का विस्तार करना चाहिए जबकि वाशिंगटन के प्रति स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए।

ब्रह्म चेलानी ने लिखा- BRICS पश्चिमी प्रभुत्व के अंत का संदेश

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार, ब्रह्म चेलानी ने कहा कि BRICS केवल प्रतीकात्मक समूह नहीं, बल्कि पश्चिमी प्रभुत्व के अंत का संदेश है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने हाल के समय में ठोस प्रगति की है। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) उभरते देशों द्वारा स्थापित पहला वैश्विक विकास बैंक है। जिसमें सभी सदस्यों का बराबर शेयर है और वोटिंग का अधिकार है। यह विश्व बैंक और IMF की तरह नहीं है, जहां अमेरिका का वीटो है। चेलानी ने कहा कि BRICS ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नया रूप दिया, उभरते देशों की जगह बढ़ाई, दक्षिण-दक्षिण सहयोग मजबूत किया और सुधारों का दबाव बनाया।

ब्रह्म चेलानी ने कहा कि BRICS पश्चिमी देशों पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से हटकर सचमुच बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है। शनिवार से शुरू हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के मेज़बान के तौर पर, नई दिल्ली BRICS को एक ऐसे मंच के रूप में ढालने की कोशिश कर रही है जो सुधारवादी बहुपक्षवाद को बढ़ावा दे और जिसका झुकाव स्पष्ट रूप से पश्चिम-विरोधी न हो। यह भारत की रणनीतिक नीति के अनुरूप है, जो गुट-आधारित राजनीति के बजाय 'मल्टी-अलाइनमेंट' (कई देशों के साथ तालमेल) को प्राथमिकता देती है।

Updated on:
10 Sept 2026 10:58 am
Published on:
10 Sept 2026 10:57 am
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