
Sourav Das, Ashutosh Ranka and Ajinkya Shinde Arrested: नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव एक बार फिर चर्चा में है। पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर 14 अक्टूबर को होने वाली अदालत की पेशी पर टिकी है। इस मामले में बॉन्ड उल्लंघन से लेकर सरकारी काम में बाधा डालने तक के आरोप शामिल हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने CJP के तीन नेताओं को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार नेताओं की पहचान सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के रूप में हुई है। तीनों को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख अधिवक्ता रत्ना सिंह के मुताबिक, 14 अक्टूबर को तीनों को एससीएम (लघु वाद न्यायालय) में पेश किया जाएगा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका पर बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, अजिंक्य शिंदे के साथ तीनों नेताओं पर जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर अदालत में होने वाली कार्यवाही आगे की कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट करेगी। फिलहाल, आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।
रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गिरफ्तारी और पेशी से संबंधित जानकारी साझा की। उनके अनुसार, यह कार्रवाई 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के सिलसिले में हुई। मामले में पुलिस का पक्ष और अदालत की विस्तृत टिप्पणियां सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकेगी।
इस घटनाक्रम के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की गैरमौजूदगी भी ध्यान खींच रही है। जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट से उन्हें सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें उनकी दादी के निधन की सूचना दी थी। इस दौरान का एक वीडियो भी सामने आया था।
दिपके के मुंबई स्थित घर पर होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि उनकी मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह आगे के किसी प्रदर्शन में शामिल होंगे या नहीं।
जंतर-मंतर दिल्ली में निर्धारित विरोध-प्रदर्शनों के प्रमुख स्थलों में शामिल है। यहां प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अनुमति, निर्धारित शर्तों और सार्वजनिक व्यवस्था के सवाल अहम हो जाते हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।
ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बाद अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। 14 अक्टूबर की पेशी में आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।