राष्ट्रीय

जब कांग्रेस सरकार में थी, तब बीजेपी ने की थी चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग, राष्ट्रपति को सौंपा था ज्ञापन

Naveen Chawla Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच जानिए, 2006 में बीजेपी और एनडीए ने तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की मांग क्यों की थी और 2009 में यह विवाद फिर कैसे गरमाया।
3 min read
• •
Oct 17, 2026
Election Commission of India controversy
नवीन चावला को हटाने के लिए NDA सांसदों ने राष्ट्रपति को सौंपा था ज्ञापन (Photo-IANS)

Gyanesh Kumar Resignation Demand: इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) को लेकर खुलासा होने के बाद विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष सड़क पर उतर गया है। इसके साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र संगठनों ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। दरअसल, यह पहली बार नहीं है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। 

बता दें कि वर्तमान में केंद्र में एनडीए की सरकार है, वहीं इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार है। विपक्षी दलों द्वारा ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा और मोदी सरकार से सीईसी को हटाने की मांग की गई है। दरअसल, चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग की भूमिका और उसके अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठना कोई नई बात नहीं है। 

इससे पहले कांग्रेस नीत गठबंधन यूपीए की सरकार में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की मांग की थी। 

राष्ट्रपति को सौंपा था ज्ञापन 

साल 2006 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में एनडीए के करीब 200 से अधिक सांसदों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था। इस दौरान उन्होंने मांग की थी कि नवीन चावला को तुरंत पद से हटाया जाए। 

एनडीए सांसदों की ज्ञापन में मुख्य मांग थी कि चावला को चुनाव आयुक्त पद से हटाया जाए क्योंकि चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए और दिखना भी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि नवीन चावला की कांग्रेस से निकटता और आपातकाल का रिकॉर्ड उन्हें इस पद के लिए अनुपयुक्त बनाता है। चावला पर एक आरोप यह भी लगाया कि ट्रस्टों को मिले फंड उनकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा करते हैं।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि एनडीए सांसदों ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला का झुकाव कांग्रेस की ओर है। इस दौरान NDA सांसदों ने नवीन चावला के गांधी-नेहरू परिवार के साथ पुराने संबंधों का भी जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन चावला के पद पर बने रहने से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकता है।

विवाद की जड़ 2006 में थी, लेकिन 2009 में फिर क्यों गरमाया मामला?

बता दें कि यह मामला एक बार फिर लोकसभा चुनाव 2009 से पहले सामने आ गया। जनवरी 2009 में तत्कालीन सीईसी एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को नवीन चावला को हटाने की सिफारिश भेजी। यह सिफारिश आर्टिकल 324(5) के तहत थी, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त को CEC की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है।

एन गोपालस्वामी ने आरोप लगाया कि नवीन चावला का कामकाज पक्षपातपूर्ण था। हालांकि चावला ने इन आरोपों को खारिज किया था। 

राष्ट्रपति और केंद्र सरकार ने क्या फैसला लिया?

हालांकि राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सलाह पर गोपालस्वामी की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया। इस फैसले के बाद नवीन चावला चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहे। इसके कुछ ही दिन बाद, मार्च 2009 को चावला को अगला मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने की घोषणा हुई। बीजेपी ने यूपीए सरकार के इस फैसले का विरोध किया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। 

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है?

देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की निर्वाचन आयोग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधान हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश ली जाती है। इस समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। इसके अलावा इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री होते हैं। 

कानून के मुताबिक, चयनित व्यक्ति को भारत सरकार में सचिव स्तर के पद पर काम करने का अनुभव होना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह साल या 65 वर्ष की आयु तक होता है। इनमें से जो भी अवधि पहले पूरी होती है, उसी के आधार पर कार्यकाल समाप्त होता है।

Updated on:
17 Oct 2026 12:38 pm
Published on:
17 Oct 2026 12:33 pm