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Patrika Explainer: पहले नवीन पटनायक और अब जगन मोहन रेड्डी, BJD और YSRCP ने चुन लिया है रास्ता? BJP की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Gyanesh Kumar Resignation Demand: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष को BJD और YSRCP का समर्थन मिलने से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या CEC का मुद्दा क्षेत्रीय दलों और विपक्ष को एकजुट कर संसद के सियासी समीकरण बदल सकता है?
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भारत

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Ashib Khan

•

Oct 15, 2026

Opposition unity against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar

CEC ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर क्षेत्रीय दलों के समर्थन करने से BJP के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है (Photo-IANS)

Opposition Protest Against Chief Election Commissioner: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा सड़क पर आंदोलन किया जा रहा है। इंडिया गठबंधन, सीजेपी और छात्र संगठन सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर गए है। इतना ही नहीं ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को अब उन क्षेत्रीय दलों का भी समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है, जो लंबे समय तक कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन से दूरी बनाए रखते थे।

पहले नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (Biju Janata Dal - BJD) ने सीईसी के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। उनकी पार्टी के सांसद इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके अलावा वाईएस जगनमोहन रेड्डी की पार्टी का नाम वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSR Congress Party - YSRCP) ने भी कांग्रेस की मांग का समर्थन किया है। YSRCP प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग उठाई।

दोनों दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मामले में इंडिया गठबंधन की मांग का समर्थन करना बीजेपी के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं इन सभी घटनाक्रमों के बीच एक सवाल खड़ा हो रहा है- क्या मुख्य चुनाव आयुक्त सीईसी का मुद्दा सभी क्षेत्रीय और विपक्षी दलों को एक मंच पर ला रहा है? 

बता दें कि यदि यह मुद्दा सभी क्षेत्रीय दल और विपक्षी दलों को एक मंच पर ला रहा है तो बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी हो रही है। क्योंकि संसद से लेकर आगामी चुनावों में बीजेपी के लिए नुकसान हो सकता है। 

नवीन पटनायक ने बदला अपना रुख, लेकिन BJD इंडिया गठबंधन से बाहर

ओडिशा में विधानसभा चुनाव 2024 में मिली हार के बाद नवीन पटनायक की पार्टी बीजेपी और बीजेपी के रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। पहले BJD ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की थी। इसके बाद राहुल गांधी के आह्वान पर सीईसी के खिलाफ बुलाए गए प्रदर्शन में बीजेडी शामिल हुई। हालांकि इस पर पार्टी का कहना है कि हम इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं हुए है, लेकिन हमारा मुद्दा एक है। इसलिए हम प्रदर्शन में शामिल हुए है। 

वहीं BJD के इस कदम का राजनीतिक महत्व इसलिए है, क्योंकि पार्टी लंबे समय तक केंद्र में सत्तारूढ़ BJP और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष, दोनों से समान दूरी बनाए रखने की नीति पर चलती रही थी। 

जगन मोहन रेड्डी का रुख भी अहम, नियुक्ति कानून पर पुनर्विचार की मांग

YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा था। उन्होंने पिछले महीने कहा था कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा कायम रहना जरूरी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की। 

जगन मोहन रेड्डी ने यह भी कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में शामिल करने के लिए बने कानून में संशोधन पर विचार किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि जिस कानून पर वह पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं, उसे पारित किए जाने के समय उनकी पार्टी ने समर्थन दिया था।

वहीं उन्होंने आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाया है। एक्स पर पोस्ट करते हुए रेड्डी ने कहा कि सिर्फ समस्या पैदा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, पहले से कदम उठाने पर बेहतर परिणाम मिलते हैं। चुनाव व्यवस्था में एक कमी है, जिसे ठीक करने की जरूरत है। लोगों का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा फिर से कायम करना जरूरी है।

उन्होंने आगे लिखा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि स्थिति और बिगड़ सकती है। मुझे सौरव दास और आशुतोष रंका के प्रति सहानुभूति है और मैं उनकी स्थिति को समझता हूँ।

BJP के सामने दोहरी चुनौती: विपक्षी एकजुटता और संसद का गणित

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में SIR को लेकर हुए खुलासे के बाद बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी हो रही है। विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए बीजेपी ने अपनी रणनीति भी बदल ली है। पार्टी लगातार विपक्ष के आरोपों पर काउंटर अटैक कर रही है। लेकिन क्षेत्रीय दलों का भी विपक्ष के साथ आना बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। 

दरअसल, एनडीए को संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर सरकार को पहले ही संसदीय चुनौती का सामना करना पड़ा है। अप्रैल 2026 में संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक विशेष बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद उससे जुड़े परिसीमन विधेयक पर आगे की कार्यवाही नहीं हुई।