
Nashik Simhastha Kumbh: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीबी वराले ने मराठी माध्यम के स्कूलों की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि देश में शिक्षा के लिए बजट आवंटन कम होने से सरकारी स्कूलों की दशा बदहाल है। उन्होंने बीते शनिवार को नासिक में सरकारी स्कूल बंद होने के कारणों को लेकर कहा कि अगर कुंभ मेले के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित फंड का सिर्फ 0.1 फीसदी भी शिक्षा पर खर्च किया जाता, तो 100 से ज्यादा मराठी-माध्यम के स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था।
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की खबर के मुताबिक, जस्टिस वराले नासिक में अपने स्कूल के दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, "हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार कुंभ इंफ्रास्ट्रक्चर पर 34,000 करोड़ रुपये और कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर 11,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। हालांकि मुझे ऐसे खर्च पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर कुंभ के लिए आवंटित राशि का सिर्फ 0.1 फीसदी, यानी लगभग 32 करोड़ रुपये, शिक्षा पर खर्च किया जाता, तो 100-150 से ज्यादा मराठी स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था।" सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को सूचित किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 13 मार्च 2026 को हुई शीर्ष समिति की बैठक में 22,425.39 करोड़ रुपये की व्यापक कुंभ मेला विकास योजना को मंजूरी दी है। नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेला इस साल अक्टूबर में शुरू होने वाला है।
उन्होंने आश्रमशालाओं (आवासीय स्कूलों) की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पढ़ा था कि एक आश्रमशाला में जमीन पर सो रही तीन छात्राओं की सांप के काटने से मौत हो गई थी।
जस्टिस पीबी वराले ने कहा, "कई आवासीय स्कूलों की कुल मिलाकर स्थिति बहुत खराब है।" शिक्षा के ढांचागत बुनियादी ढांचे में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए जस्टिस वराले ने कहा कि शिक्षा के लिए बजट आवंटन, जो पहले 8-12 फीसदी के बीच था, उसमें कमी आई है।