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कश्मीरी पंडितों को फिर धमकी! ऑनलाइन हिट लिस्ट में नाम, नंबर और घर के पते तक; RSS का भी किया जिक्र

Kashmiri Pandit Threat List: कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और घाटी में रह रहे समुदाय के लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाने वाली एक ऑनलाइन हिट लिस्ट सामने आने से सुरक्षा चिंता बढ़ गई है। ULC के नाम से जारी सूची में नाम, मोबाइल नंबर और पते शामिल होने का दावा है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं।
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Aug 24, 2026
Kashmiri Pandit staff security alert
कश्मीरी पंडितों को मिली धमकी (Photo-IANS)

ULC Kashmir Threat: कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और घाटी में रह रहे समुदाय के लोगों के बीच एक नई ऑनलाइन हिट लिस्ट सामने आने के बाद दहशत का माहौल है। यह सूची यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से जारी की गई है, जिसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है। लिस्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई है और इसे शेयर करने वाले और इसकी सत्यता की जांच में जुट गई है। 

लोगों के नाम और नंबर तक दर्ज

इस लिस्ट में निशाना बनाए गए लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और घर के सटीक पते तक दर्ज हैं। जम्मू और कश्मीर, दोनों जगह रहने वाले कश्मीरी पंडित परिवारों की जानकारी इसमें शामिल होने की बात कही जा रही है। कुछ मामलों में वाहन पंजीकरण नंबर भी दर्ज होने का दावा है।

पीएमआरपी कर्मचारियों की जानकारी भी शामिल

बताया जा रहा है कि लिस्ट में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PMRP) के तहत घाटी में नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और संपर्क विवरण भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई परिवारों के घरों के गली-मोहल्ले और मकान नंबर तक दिए गए हैं। इस वजह से सुरक्षा एजेंसियां संभावित डेटा लीक की आशंका की भी जांच कर रही हैं।

गद्दार शब्द से किया संबोधित

धमकी में कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों को कथित तौर पर ‘गद्दार’ और ‘व्हाइट-कॉलर टेररिस्ट’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया है। इसे समुदाय की घाटी में वापसी और पैतृक संपत्तियों पर दोबारा अधिकार हासिल करने की कोशिशों को हतोत्साहित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

पहले भी जारी हुई थीं धमकियां

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को इस तरह की धमकियां पहले भी मिल चुकी हैं। पिछली घटनाओं के बाद प्रशासन ने प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त अल्पसंख्यक कर्मचारियों को कुछ समय के लिए घर से काम करने की सलाह दी थी। इसके साथ ही घाटी में बने ट्रांजिट कैंपों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई थी।

हालांकि, इस बार कथित धमकी में व्यक्तिगत जानकारी के इतने विस्तृत तरीके से सामने आने ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

‘90 के दशक में भी मूकदर्शक बने रहे’

कश्मीरी पंडित संगठन ‘रूट्स इन कश्मीर’ से जुड़े अमित रैना ने इस मामले पर नागरिक समाज संगठनों और कश्मीर-केंद्रित राजनीतिक नेतृत्व की कथित चुप्पी पर सवाल उठाया है।

रैना ने कहा कि 1990 के दशक में भी जब कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा था, तब कई लोग मूकदर्शक बने रहे, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर समुदाय का पलायन हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा मामले में भी इसी तरह की चुप्पी देखने को मिल रही है।

बताया जा रहा है कि धमकी पत्र में यह आरोप भी लगाया गया कि निशाना बनाए गए लोग कश्मीर में आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।

Updated on:
24 Aug 2026 05:59 pm
Published on:
24 Aug 2026 05:59 pm