
Maharashtra Crime News: शिवसेना उद्धव गुट के विभाग प्रमुख प्रदीप पूर्णेकर की हत्या के मामले में जांच के दौरान नई जानकारी सामने आई है। आमतौर पर चप्पल पहनकर आने वाला मुख्य संदिग्ध सुभाष उर्फ पप्या शिंदे घटना वाले दिन जूते पहनकर कार्यालय पहुंचा था। पुलिस अब उसके इस बदलाव और केबिन का दरवाजा खुला रखने की वजह को जांच का अहम हिस्सा मान रही है। महाराष्ट्र के ठाणे में हुए इस हत्याकांड की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।
पूर्णेकर के परिवार ने हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश होने का आरोप लगाया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार हत्या से एक दिन पहले पप्या शिंदे पूर्णेकर के कार्यालय में चप्पल पहनकर आया था। केबिन में जाने से पहले उसने अपनी चप्पल बाहर उतार दी थी।
उस समय कार्यालय के बाहर बैठे पूर्णेकर के एक कार्यकर्ता ने उसकी चप्पल पहनकर बाहर जाने की कोशिश की तो पप्या ने उसे टोका था। हालांकि हत्या वाले दिन पप्या चप्पल की जगह जूते पहनकर कार्यालय पहुंचा। उसने जूते उतारे बिना ही पूर्णेकर के केबिन में प्रवेश किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान उसने अपना एक पैर दरवाजे के बाहर की तरफ रखा, ताकि केबिन का दरवाजा बंद नहीं हो सके। जांच में इस बात को अहम माना जा रहा है कि उसने ऐसा क्यों किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पप्या शिंदे के केबिन में मौजूद रहने के दौरान संतोष कनोजिया उर्फ टल्ली वहां पहुंचा। कुछ देर बाद नितेश पवार उर्फ भावड्या भी वहां आ गया। इसके बाद दोनों ने पूर्णेकर पर गोलियां चलाईं। फिर निखिल यादव और अमित सिंह उर्फ पप्पलू ने उन पर हमला किया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में हत्या से पहले संतोष कनोजिया और नितेश पवार पप्या शिंदे की दोपहिया गाड़ी से इलाके में आते दिखाई दिए हैं। जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि वारदात के बाद आरोपियों को मौके से भागने में मदद करने के लिए पप्या ने चार पहिया वाहन का इंतजाम किया था। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या की साजिश और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जूते पहनकर केबिन में जाने और दरवाजा खुला रखने से जुड़े घटनाक्रम की अहमियत भी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।