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क्रीमी लेयर नियम पर SC का फैसला, केंद्र ने 2025 सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए मांगी राहत, 100 OBC दावों पर संशय

Civil Services Exam: क्रीमी लेयर मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 11 मार्च के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा है। जानिए CSE-2025 बैच के प्रभावित OBC उम्मीदवारों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
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Aug 25, 2026
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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र ने मांगा स्पष्टीकरण (फाइल फोटो)

Civil Services Exam: क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने कोर्ट से 11 मार्च के उस फैसले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है, जिसमें कहा गया था कि OBC वर्ग में क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल कमाई (वेतन) को आधार नहीं बनाया जा सकता। सरकार का रुख मुख्य रूप से सिविल सेवा परीक्षा (CSE)-2025 के बैच को लेकर है, जिसकी चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

मसूरी में ट्रेनिंग से ठीक पहले सरकार की याचिका

सरकार ने यह अर्जी ऐसे समय में दाखिल की है जब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में CSE-2025 बैच का फाउंडेशन कोर्स शुरू होने वाला है। DoPT का कहना है कि 11 मार्च का फैसला CSE-2025 के अंतिम परिणाम घोषित होने के ठीक पांच दिन बाद आया था। अगर इसे CSE-2025 बैच पर तुरंत लागू किया गया, तो मेरिट लिस्ट, कैडर आवंटन, अधिकारियों की ट्रेनिंग और सीनियोरिटी (वरिष्ठता) पर बड़ा असर पड़ेगा।

क्या है 2004 से जुड़ा पूरा विवाद?

यह पूरा मामला 14 अक्टूबर 2004 के सरकारी पत्र से जुड़ा है। 1993 के मूल नियम के मुताबिक OBC में क्रीमी लेयर तय करने के लिए वेतन और कृषि आय को शामिल नहीं किया जाना था। हालांकि, 2004 के आदेश में PSU और प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों की वेतन आय को भी इसके दायरे में जोड़ दिया गया।
उम्मीदवारों का कहना था कि यह नियम सरकारी और प्राइवेट/PSU कर्मचारियों के बच्चों के बीच भेदभाव करता है। यह नियम CSE-2015 से सख्ती से लागू किया गया, जिसके बाद से अब तक लगभग 100 सफल OBC उम्मीदवारों के दावों को क्रीमी लेयर के आधार पर खारिज कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

11 मार्च को उम्मीदवार रोहित नाथन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि PSU या प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत लोगों के बच्चों को केवल वेतन आय के आधार पर आरक्षण के लाभ से बाहर रखना असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा था कि एक ही सामाजिक वर्ग के समान स्थिति वाले OBC सदस्यों के बीच ऐसा भेद अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने फैसले को लागू करने के लिए 6 महीने का समय दिया था।

आगे क्या होगा?

DoPT पहले ही प्रभावित उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर चुका था। यदि 11 मार्च का आदेश बिना किसी शर्त के लागू होता है, तो 2016 से प्रभावित लगभग 100 उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है और उनकी रैंक में संशोधन हो सकता है। हालांकि, केंद्र ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस फैसले से पहले हो चुके दाखिले, डिग्रियां और CSE-2025 का सेवा आवंटन प्रभावित न हो।

Updated on:
25 Aug 2026 08:54 am
Published on:
25 Aug 2026 08:42 am