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पत्रिका एक्सप्लेन : किस रूट से कैसे आता है, देशभर में कैसे बारिश लाता है मानसून

Monsoon Route in India: दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में कैसे पहुंचता है, केरल में सबसे पहले क्यों आता है, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाएं कैसे देशभर में बारिश लाती हैं, अल नीनो-ला नीना, मानसून ट्रफ, निम्न वायुदाब और मौसम पूर्वानुमान की पूरी जानकारी पढ़ें।
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Updated: 6 Jun 2026, 1:28 AM IST
Monsoon
दिल्ली में मौसम हुआ सुहाना, बारिश से तापमान में गिरावट। (Photo- IANS)

Monsoon Facts: दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि की जीवन रेखा है। यह विश्व की सबसे बड़े मौसमी हवा प्रणालियों में से एक है। मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवन शैली का अभिन्न अंग भी है। मानसून को भारत की आत्मा भी कह सकते हैं। मानसून को लेकर हमारे जेहन में देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून कैसे पहुंचता है और आगे बढ़कर राज्यों को कैसे कवर करता है, जैसे कई सवाल है।

दरअसल में हवाओं के मौसमी परिवर्तन और उनसे होने वाली वर्षा की प्रणाली को मानसून कहा जाता है। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की लगभग 70-75% वार्षिक बारिश लाता है। गर्मियों में भारतीय उपमहाद्वीप तेजी से गर्म होता है, जिससे उत्तर भारत में हवाओं का निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है। वहीं हिंद महासागर पर उच्च दबाव रहता है। इस दबाव के अंतर के कारण दक्षिण-पश्चिम दिशा से नम हवाएं भारतीय भूमि की ओर खिंचकर आती हैं।

कहां से आता है मानसून

ये हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आती हैं, जिससे भारी बारिश होती है। मानसून हवाओं के दो मुख्य रूट अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखा है। अरब सागर में ये हवाएं केरल से शुरू होकर मुंबई, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ती है। बंगाल की खाड़ी की तरफ से ये हवाएं अंडमान-निकोबार से शुरू होकर पूर्वोत्तर राज्यों, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ती है।

सबसे पहले केरल क्यों पहुंचता है?

केरल भारत का दक्षिण-पश्चिमी तटीय राज्य है, जो समुद्र के सबसे निकट स्थित है। इसलिए अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएं सबसे पहले केरल पहुंचती हैं। आइएमडी वर्षा, हवाओं की दिशा, बादलों की स्थिति और अन्य मौसमीय मापदंडों के आधार पर केरल में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा करता है। केरल पहुंचने की सामान्य तिथि 1 जून है। कई बार तय समय से कुछ दिन पहले या कुछ देरी से भी पहुंचता रहा है। इस बार यह तीन दिन देरी से पहुंचा। केरल में प्रवेश के बाद हवाओं की गति की अनुकूलता से मानसून 15 जुलाई तक पूरे भारत को कवर कर लेता है।

मौसम पूर्वानुमान क्यों जरूरी है?

भविष्य में मौसम की स्थिति जैसे वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा का वैज्ञानिक अनुमान मौसम पूर्वानुमान कहलाता है। आइएमडी समुद्री सतह के तापमान, वायुमंडलीय दबाव, अल नीनो-ला नीना तथा अन्य वैश्विक मौसमीय कारकों का विश्लेषण करके पूर्वानुमान तैयार करता है। किसान बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग, फसल सुरक्षा और कटाई से संबंधित निर्णय पूर्वानुमान के आधार पर बेहतर ढंग से कर सकते हैं। इससे जोखिम कम होता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।

मानसून ट्रफ, निम्न वायुदाब व डिप्रेशन क्या है?

मानसून ट्रफ निम्न वायुदाब की एक लंबी पट्टी होती है जो मानसून के दौरान उत्तर भारत में विकसित होती है और वर्षा को प्रभावित करती है। वायुदाब एक ऐसा क्षेत्र जहां आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कम होता है। यह बादलों और वर्षा के विकास में सहायक होता है। डिप्रेशन निम्न वायुदाब का अधिक संगठित और मजबूत रूप, जो भारी वर्षा का कारण बन सकता है।

अल नीनो व ला नीना क्या है?

अलनीनो में प्रशांत महासागर के जल का असामान्य रूप से गर्म हो जाना। इससे भारतीय मानसून कमजोर हो सकता है। ला नीना में प्रशांत महासागर के जल का सामान्य से अधिक ठंडा होना। इससे भारत में सामान्य या बेहतर वर्षा की संभावना बढ़ती है।

Updated on:
6 Jun 2026, 1:28 AM IST
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