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धरती से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष स्टेशन में एयर लीक से हड़कंप, यात्रियों को अलर्ट जारी

Space station leak: धरती से 400 किमी ऊपर स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा के रिसाव से चिंता बढ़ गई है। नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों को अलर्ट पर रखा है, जबकि रूसी दल ज्वेजदा मॉड्यूल में लीक को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। जानें पूरा मामला।

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International Space Station

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (Photo Credit - NASA)

ISS air leak: धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊंचाई पर धरती के चक्कर लगा रहे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा के रिसाव से हड़कंप मच गया। रूसी चालक दल इस रिसाव को ठीक करने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि रिसाव भी आईएसएस के रूसी हिस्से (ज्वेजदा) में ही बताया जा रहा है। इस बीच नासा ने शुक्रवार सुबह वहां मौजूद क्रू-12 मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेससूट पहनने और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए आपातकालीन निकासी के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

इस मिशन में नासा की जेसिका मीर और जैक हैथवे, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी सोफी एडेनोट और रूसी अंतरिक्ष यात्री आंदे्र फेद्येव मौजूद हैं। नासा की प्रवक्ता बेथनी स्टीवंस ने बताया कि हाल के महीनों में यह एयर काफी कम था, लेकिन सोमवार को स्थिति अचानक तब बिगड़ गई, जब लीक होने वाली हवा की मात्रा एक पाउंड प्रतिदिन से बढ़कर दो पाउंड (लगभग दोगुनी) हो गई। इसके बाद नासा को अंतरिक्ष यात्रियों को अलर्ट करना पड़ा।

आमतौर पर नासा ऐसी चेतावनी अंतरिक्ष का कचरा स्टेशन से टकराने की आशंका या हवा के दबाव में बड़े बदलाव को देखते हुए दी जाती है। लेकिन इस बार हवा लीक होने से ऐसी नौबत आई है। हालांकि स्टीवंस का दावा है कि गड़बड़ी को जल्द सुधार लिया जाएगा।

क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन

आईएसएस धरती से ऊपर 400 किमी ऊपर फुटबॉल के आकार की एक प्रयोगशाला है। इसमें अंतरिक्ष यात्री रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी पर प्रयोग करते हैं। अंतरिक्ष स्टेशन 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूम रहा है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। इसे पांच देशों ने मिलकर बनाया था, जो 2000 से निरंतर काम कर रहा है।

कभी खाली करने की नहीं आई नौबत

स्पेस स्टेशन के 27 साल लंबे इतिहास में अब तक कभी भी इसे पूरी तरह खाली करने की नौबत नहीं आई है। आम तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों को 'सेफ-हेवन' जैसे निर्देश बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही दिए जाते हैं, जैसे किसी संभावित अंतरिक्ष मलबे का टकराव या केबिन प्रेशर में अचानक बड़ा बदलाव। अच्छी बात यह है कि इतने वर्षों से लगातार इंसानों का घर बने इस अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को आपात स्थिति में कभी भी पूरी तरह खाली नहीं करना पड़ा है।