काली मूवी विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मां काली का असीमित, असीम आशीर्वाद हमेशा भारत के साथ है। भारत इसी आध्यात्मिक ऊर्जा को लेकर आज विश्व कल्याण की भावना से आगे बढ़ रहा है।
देश में पिछले कई दिनों से काली मूवी के पोस्टर को लेकर विवाद चल रहा है। वहीं इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां काली को पूरे भारत में भक्ति का केंद्र बताया। दरअसल गुजरात के सूरत में 'प्राकृतिक कृषि सम्मेलन' का आयोजन हो रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मां काली का असीमित, असीम आशीर्वाद हमेशा भारत के साथ है। भारत इसी आध्यात्मिक ऊर्जा को लेकर आज विश्व कल्याण की भावना से आगे बढ़ रहा है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस, एक ऐसे संत थे जिन्होंने मां काली का स्पष्ट साक्षात्कार किया था। उन्होंने मां काली के चरणों में अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। वो कहते थे-ये सम्पूर्ण जगत, ये चर-अचर, सब कुछ मां की चेतना से व्याप्त है। इसके साथ ही उन्होंने कहा यही चेतना बंगाल की काली पूजा में दिखती है।
हमारे संतों ने हमें दिखाया है कि जब हमारे विचारों में व्यापकता होती है, तो अपने प्रयासों में हम कभी अकेले नहीं पड़ते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आप भारत वर्ष की धरती पर ऐसे कितने ही संतों की जीवन यात्रा देखेंगे जिन्होंने बिना संसाधनों के साथ शिखर जैसे संकल्पों को पूरा किया।
भारत स्वभाव और संस्कृति से कृषि आधारित देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक कृषि सम्मेलन संबोधित करते हुए कहा कि जब आप प्राकृतिक खेती करते हैं तो आप धरती माता की सेवा करते हैं, मिट्टी की क्वालिटी, उसकी उत्पादकता की रक्षा करते हैं। जब आप प्राकृतिक खेती करते हैं तो आप प्रकृति और पर्यावरण की सेवा करते हैं। पीएम मोदी ने कहा जब आप प्राकृतिक खेती से जुड़ते हैं तो आपको गौमाता की सेवा का सौभाग्य भी मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा हमारा जीवन, हमारा स्वास्थ्य, हमारा समाज सबके आधार में हमारी कृषि व्यवस्था ही है। भारत तो स्वभाव और संस्कृति से कृषि आधारित देश ही रहा है। इसलिए जैसे-जैसे हमारा किसान आगे बढ़ेगा, जैसे-जैसे हमारी कृषि उन्नत और समृद्ध होगी, वैसे-वैसे हमारा देश भी आगे बढ़ेगा।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का उल्लेख करते हुए कहा आप देश के किसी भी हिस्से में जाइए, आपको ऐसा शायद ही कोई क्षेत्र मिलेगा जहां विवेकानंद जी गए न हों, या उनका प्रभाव न हो। उन्होंने यह यात्राएं गुलामी के उस दौर में देश को उसकी पुरातन राष्ट्रीय चेतना का अहसास करवाया, उसमें नया आत्मविश्वास फूंका। सैकड़ों साल पहले आदि शंकराचार्य हों या आधुनिक काल में स्वामी विवेकानंद, हमारी संत परंपरा हमेशा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का उद्घोष करती रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा रामकृष्ण मिशन की तो स्थापना ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार से जुड़ी हुई है।