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कर्नाटक में अब डिप्टी CM पद के लिए बवाल, कांग्रेस के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट, 2 समुदायों ने दे डाली सीधी चेतावनी

Karnataka Congress crisis: कर्नाटक में डिप्टी सीएम पद को लेकर अब बवाल मच गया है। दलित समाज मुनियप्पा और लिंगायत समुदाय एश्वर खंद्रे के नाम पर अड़ा है।
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Updated: 30 May 2026, 3:39 PM IST
Rahul Gandhi and Mallikarjun Kharge - File PIC
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे। (फाइल फोटो- पत्रिका)

कांग्रेस में मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम पद को लेकर घमासान चल रहा है। दो बड़े समुदायों ने साफ चेतावनी दे दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। दलित नेताओं ने तो एयरपोर्ट पर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाया, वहीं लिंगायत संत ने भी अपना दावा पेश कर दिया।

केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार को मादारा महासभा और विभिन्न दलित संगठनों के कार्यकर्ता जुटे। उन्होंने पूर्व मंत्री के एच मुनियप्पा को डिप्टी सीएम बनाने की मांग को लेकर पोस्टर लगाए और एआईसीसी कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को मेमोरेंडम सौंपा।

प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा?

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मादिगा समुदाय को अब तक मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम या यहां तक कि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष का पद कभी नहीं मिला। इस बार उन्हें डिप्टी सीएम जरूर बनाया जाए। एक नेता ने साफ कहा- अगर कांग्रेस हमारी बात नहीं मानती है तो हमें पार्टी को सबक सिखाना पड़ेगा।

लिंगायत संत का भी खुला ऐलान

दलितों की मांग के साथ ही लिंगायत समुदाय भी मैदान में उतर आया है। गुरु बसव पट्टदेवरू और उनके समर्थकों ने सीनियर नेता ईश्वर खंदरे को डिप्टी सीएम बनाने की मांग की है।

गुरु जी ने कहा- अगर ईश्वर खंदरे को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया तो लिंगायत समुदाय अगले चुनाव में कांग्रेस को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगा।

ये दोनों दावेदारियां कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गई हैं क्योंकि कर्नाटक में दलित और लिंगायत दोनों ही वोट बैंक काफी अहम हैं।

आज फैसला होने वाला है

कांग्रेस के बड़े नेता के सी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला पहले ही बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। शाम को लेजिस्लेटिव पार्टी की बैठक होने वाली है। उम्मीद है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा और कम से कम दो डिप्टी सीएम भी घोषित किए जा सकते हैं।

के एच मुनियप्पा ने इस बारे में कहा- कुछ लोग प्रस्ताव रख रहे हैं, कुछ समर्थन कर रहे हैं। ये सामान्य प्रक्रिया है। शाम तक सब कुछ तय हो जाएगा।

उधर, दलित नेताओं का साफ कहना है कि उनकी आबादी अच्छी खासी है लेकिन पार्टी में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।

लिंगायत समुदाय भी पिछले चुनाव में कांग्रेस के साथ आया था और अब अपनी हिस्सेदारी चाहता है। दोनों तरफ से सबक सिखाने की चेतावनी ने कांग्रेस हाईकमान को सोचने पर मजबूर कर दिया है।