
बेंगलुरु। कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन विवाद पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने उन्हें जवाब दिया है। खरगे ने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है और यदि कुमारस्वामी के खिलाफ एक भी सबूत मिलता है, तो उन्हें समन भेजने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी। बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि कोई भी उन्हें छूना नहीं चाहता। अगर आपको याद हो, जब हमने उनके पदाधिकारियों को नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने को कहा था, तब वे खुद कमिश्नर ऑफिस आए थे और 'टच मी' (मुझे छूकर दिखाओ) कहा था। वे पदयात्रा निकालकर डीजी ऑफिस भी गए थे।
प्रियांक खरगे ने स्पष्ट किया कि पुलिस या सरकार को उन्हें परेशान करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है, तो हम उन्हें क्यों बुलाएंगे? लेकिन यदि उनके खिलाफ थोड़ा भी सुराग मिला, तो हम उन्हें समन करेंगे। मैं गृह मंत्री हूं, इसका मतलब यह नहीं कि मेरे पास कोई असंवैधानिक ताकत है; मुझे कानून के दायरे में रहकर काम करना है और मैं वैसा ही कर रहा हूं।
अपनी सरकार की कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए खरगे ने केंद्र सरकार की तारीफ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कल ही हमें केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रज्वल रेवन्ना (कुमारस्वामी के भतीजे) के मामले में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पुरस्कार मिला है। अमित शाह ने खुद मुझे मेडल पहनाकर कहा है कि कर्नाटक पुलिस ने शानदार काम किया है। इसलिए कुमारस्वामी जी को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए, हम जल्द ही दिखा देंगे कि कर्नाटक पुलिस क्या करने में सक्षम है।
केपीएससी (KPSC) घोटाले को लेकर कुमारस्वामी के आरोपों पर तीखा प्रहार करते हुए गृह मंत्री खरगे ने एक ट्वीट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईडी के जरिए कांग्रेस नेताओं और मेरा नाम इस घोटाले में घसीटा जाए।
खरगे ने सवाल उठाया कि क्या मोदी कैबिनेट में एचडी कुमारस्वामी इकलौते केंद्रीय मंत्री हैं? क्या केवल वही केपीएससी घोटाले के बारे में जानते हैं? वे जिस तरह बार-बार सफाई दे रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि वे खुद किसी न किसी मामले में दोषी हैं। ये सवाल उनसे पूछे जाने चाहिए, मुझसे नहीं।