
Modi-Trump meeting at G7: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान ने देश में नया सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जून वाली मुलाकात में भारतीय पक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस न कराने और पत्रकारों द्वारा सवाल न पूछे जाने की अपील की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी चिंचा नहीं की और 45 मिनट तक मीडिया से सवाल जवाब किए। गोर के इस बयान पर कांग्रेस ने हमला बोला। वहीं, सर्जियो गोर के इस बयान पर सूत्रों के हवाले से सरकार का जवाब आया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि VVIP मुलाकातों से पहले सार्वजनिक उपस्थिति के इंतजामों पर चर्चा आम बात है। भारतीय पक्ष ने अपनी सामान्य जरूरत बताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल उनके अनिश्चित व्यवहार से सावधान रहते हैं। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ उनकी बातचीत इसका उदाहरण है। इसलिए भारत ने सतर्क रुख अपनाया।
फरवरी में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ तीखी बहस की थी। मई में ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को श्वेत किसानों के खिलाफ कथित भेदभाव पर घेरा था।
यह मुलाकात 17 जून को फ्रांस में जी7 सम्मेलन के दौरान हुई थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद संबंधों में कुछ ठंडापन था, क्योंकि ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में मध्यस्थता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऑस्लो में भी एक पत्रकार ने सवाल पूछने की कोशिश की थी, हालांकि उस दौरान भी पीएम मोदी ने जवाब नहीं दिया था।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की टिप्पणी सामने आने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया कई बातें उजागर करती है। इससे पता चलता है कि पीएम मोदी विदेशी सरकारों से मिन्नतें करते हैं कि मीडिया के सामने न लाया जाए। लेकिन वे नहीं मानते, फिर खुलेआम इसका मजाक उड़ाते हैं और मोदी जवाब भी नहीं देते क्योंकि वे कमजोर स्थिति में हैं। खेड़ा ने कहा कि इससे सिर्फ मोदी नहीं बल्कि भारत के प्रधानमंत्री पद का अपमान हो रहा है।