राष्ट्रीय

जब स्मृति ईरानी ने मांग लिया था नरेंद्र मोदी का इस्तीफा, इसके लिए अनशन करने की दे दी थी धमकी

बीजेपी की राजनीति में स्मृति ईरानी बार-बार 'कमबैक' करती रही हैं। वह अटल बिहारी वाजपेयी से प्रभावित होकर बीजेपी में आई थीं। आते ही उन्होंने गुजरात दंगे की वजह से नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांग लिया था। तब भी कई लोग मान रहे थे कि यह आगे नहीं बढ़ पाएगी, लेकिन स्मृति ने ऐसा मानने वालों को बार-बार गलत साबित किया है।
3 min read
Smriti Irani comback in BJP Nitin Nabin New Team
स्मृति ईरानी 2003 में भाजपा में आई थीं और तब से वह लगातार सुर्खियों में बनी ही रहती हैं। (Photo Source: AI)

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में बतौर महासचिव शामिल किए जाने के बाद स्मृति ईरानी एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब ढाई दशक लंबे राजनीतिक सफर में ऐसा कम ही हुआ है, जब वह सुर्खियों से दूर रही हों। एक समय तो वह घर-घर में 'तुलसी' के रूप में मशहूर थीं। इसी मशहूरियत के दौर में 2003 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली। अगले ही साल, दिसंबर 2004 में वह एक ज्वेलरी स्टोर के उद्घाटन के लिए सूरत (गुजरात) गईं। वहां उन्होंने कहा, 'अगर नरेंद्र भाई गुजरात के मुख्यमंत्री का पद छोड़ दें तो सही मायने में साबित हो जाएगा कि बीजेपी बाकी दलों से अलग है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर मोदी इस्तीफा नहीं देते तो अटल जयंती के दिन वह अनशन शुरू करेंगी। हालांकि, दिन ढलने से पहले वह बयान से पीछे भी हट गईं। बाद में वह कट्टर मोदी समर्थक हो गईं और 2019 में तो पुणे में एक कार्यक्रम में यहां तक कह दिया, 'नरेंद्र मोदी जिस दिन राजनीति छोड़ देंगे, उस दिन मैं भी छोड़ दूंगी।'

बीजेपी में आते ही खड़ा किया विवाद, फिर भी मिला मोदी का आशीर्वाद

स्मृति का सूरत में दिया बयान राजनीति में आने के बाद, राजनीतिक कारणों से उनके सुर्खियों में आने का पहला मामला था। तब किसी ने उनके बयान को वाजपेयी खेमे का साबित करने की उनकी रणनीति बताया था तो किसी ने उनका राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही खत्म होने की भविष्यवाणी कर दी थी। लेकिन, स्मृति ने दोनों खेमों को गलत साबित कर दिया। दो महीने बाद ही दिल्ली में लाल कृष्ण आडवाणी के घर एक डॉक्युमेंट्री की स्क्रीनिंग के मौके पर स्मृति ने नरेंद्र मोदी के पांव छुए और मोदी ने भी 'गुजरात की बेटी' कह कर उनके सिर पर हाथ रख दिया। 2011 में जब स्मृति को पहली बार भाजपा ने राज्य सभा भेजने का फैसला किया तो नामांकन के समय मोदी भी उनके साथ थे।

अमेठी में शानदार कमबैक

2010 में बीजेपी महिला मोर्चा की प्रमुख बनाई गईं स्मृति ईरानी को 2011 में जब राज्य सभा भेजा गया तो गुजरात से ही भेजा गया। 2014 के लोक सभा चुनाव में उन्हें अमेठी (उत्तर प्रदेश) से राहुल गांधी के खिलाफ उतारा गया। वह जीत तो नहीं सकीं, लेकिन तीन लाख से ज्यादा वोट लाकर राहुल गांधी की जीत को छोटा जरूर कर दिया। वह राहुल को ऐसी टक्कर देंगी, ऐसी उम्मीद नहीं थी। लिहाजा हार के बावजूद नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी पहली सरकार में मानव संसाधन मंत्री (HRD Minister) बनाया और बीजेपी ने अमेठी पर भी उनका फोकस बनवाए रखा। 2019 में वह राहुल गांधी के मुक़ाबले 55000 से ज्यादा वोट से जीत गईं।

एचआरडी मिनिस्ट्री छिनी तब भी कई लोगों को लगा कि कतरे गए पर

बतौर एचआरडी मिनिस्टर लगभग पूरे समय स्मृति अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहीं। आईआईटी दिल्ली के निदेशक आरके शेवगांवकर, आईआईटी बॉम्बे के चेयरमैन अनिल काकोदकर के इस्तीफे, रोहित वेमुला की आत्महत्या जैसे कई विवादों के चलते तो वह चर्चा में रहीं ही, अपनी शैक्षणिक डिग्री को लेकर भी विरोधियों के निशाने पर रहीं। अंत में उन्हें एचआरडी से हटा कर कपड़ा मंत्रालय भेज दिया गया। तब भी कई लोगों को ऐसा लगा था कि ईरानी के पर कतर दिए गए हैं और अब वह पहले की तरह उड़ नहीं पाएंगी। लेकिन, स्मृति ने उन्हें एक बार फिर गलत साबित किया। एक साल बाद ही ईरानी को सूचना व प्रसारण जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय मिल गया। हालांकि, कुछ समय बाद उनसे ये मंत्रालय वापस भी ले लिया गया था।

ईरानी ने 2019 में फिर 'कमबैक' किया। लोक सभा चुनाव जीत कर। वह भी अमेठी से! राहुल गांधी के खिलाफ! चुनाव जीतने के साथ ही उन्होंने मोदी कैबिनेट में भी वापसी की। इस बार कपड़ा केसाथ-साथ महिला व बाल विकास मंत्रालय मिला। 2022 में उन्हें अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री भी बनाया गया। यह वही मंत्रालय था जो मुख्तार अब्बास नकवी के पास था। वही नकवी, जिन्होंने 2003 में स्मृति को औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता दिलवाई थी।

अमेठी से हारीं तो टीवी की दुनिया में किया कमबैक

2024 के लोक सभा चुनाव में जब ईरानी को अमेठी में राहुल गांधी के सहयोगी किशोरी लाल शर्मा ने हरा दिया तो एक बार फिर उनके राजनीतिक करियर पर ग्रहण की बातें कही जाने लगीं। लेकिन, तब उन्होंने टीवी की दुनिया में कमबैक कर लिया। इस बीच पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में भी उन्होंने सक्रियता दिखाई। और, इस चुनाव के कुछ ही महीने बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें अपनी टीम में बतौर महासचिव ले लिया। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनाव में पार्टी निश्चित रूप से उनका भरपूर इस्तेमाल करने वाली है।

Also Read
View All