
SC Scholarship Delay: पढ़ाई के खर्च में मदद के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति अगर सालों तक अटकी रहे, तो छात्रों और उनके परिवारों को कितनी परेशानी हो सकती है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों की स्कॉलरशिप में ऐसी ही देरी का मामला संसद की लोक लेखा समिति की बैठक में उठा। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कुछ मामलों में प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के भुगतान में चार साल से ज्यादा, जबकि पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में करीब सात साल तक की देरी हुई।
इस मामले में समिति ने सात राज्यों के मुख्य सचिवों को बैठक के लिए बुलाया था। उनके नहीं पहुंचने पर समिति ने नाराजगी जताई और लोकसभा अध्यक्ष के सामने विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का फैसला किया।
केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, साल 2017 से 2022 के बीच SC छात्रों की छात्रवृत्ति के भुगतान में देरी और कई कमियां ऑडिट में सामने आई थीं। प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए होती है, जबकि पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप आगे की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को दी जाती है।
समिति की बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि छात्रों को समय पर पैसा क्यों नहीं मिला। वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी के कारण भी परेशानी हुई। उनके मुताबिक, कुछ राज्यों ने इस मामले को जरूरी प्राथमिकता नहीं दी। ऑडिट में सामने आई कमियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी तीन महीने बाद तक समिति को नहीं मिली थी।
छात्रवृत्ति में देरी और दूसरी कमियों पर जवाब लेने के लिए समिति ने सात राज्यों के मुख्य सचिवों को बैठक में बुलाया था। वेणुगोपाल ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा का नाम लिया। उनके मुताबिक, इन राज्यों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां सामने आई थीं।
वेणुगोपाल ने बताया कि सभी मुख्य सचिव बैठक में नहीं पहुंचे और कुछ की ओर से आने में असमर्थता की उचित जानकारी भी नहीं दी गई। इसके बाद समिति ने सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष के सामने विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का फैसला किया। यह प्रस्ताव अधिकारियों के बैठक में नहीं पहुंचने के मामले से जुड़ा है।
लोक लेखा समिति इस मामले पर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी। इसके बाद छात्रवृत्ति में देरी और ऑडिट में सामने आई कमियों पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ हो सकती है।
छात्रवृत्ति का पैसा कई परिवारों के लिए फीस, किताबों और पढ़ाई से जुड़े दूसरे खर्चों में मददगार होता है। ऐसे में भुगतान में सालों की देरी का सवाल सिर्फ सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजर समिति की रिपोर्ट और उसके बाद उठाए जाने वाले कदमों पर रहेगी।