
Supreme Court Delhi Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्ती से पेश आई है। दरअसल, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को CCTV फुटेज सहित सभी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि एजेंसियों के पास मौजूद CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री को संरक्षित रखा जाए। निजी पक्षों को भी संबंधित सामग्री अदालत में पेश करने की स्वतंत्रता दी गई है।
बता दें कि सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दे रही है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कोई आपत्ति नहीं जताई। आदेश में सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उनके द्वारा जुटाए गए CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने हिरासत केंद्रों से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का मुद्दा उठाया। वरिष्ठ अधिवक्ता गुरुस्वामी ने 45 हिरासत केंद्रों का जिक्र किया। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत ने इस संबंध में एक सामान्य आदेश जारी किया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने टिप्पणी की, “क्या हम चाहते हैं कि दुनिया के सामने सुप्रीम कोर्ट की ऐसी छवि पेश हो?” इस पर भाटिया ने कहा कि अदालत की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत सभी पक्षों को सुनेगी और समय की कोई कमी नहीं है। उन्होंने मामले की सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका का भी उल्लेख किया, जिसमें एक वकील ने प्रदर्शन से जुड़ी परेशानियों का मुद्दा उठाया था।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने एक अन्य याचिका में की गई मांग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि याचिका में मांग की गई है कि जो भी व्यक्ति प्रदर्शन का आह्वान करे, उसे दूसरों को होने वाले परिणामों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने इस याचिका पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता नाडकर्णी ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मांग पर जवाब देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 172 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर भी नोटिस जारी किया। इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। अदालत के आदेश के तहत CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान इन याचिकाओं पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आएगा।