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CJP प्रदर्शन पर पाबंदियों को लेकर SC में दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने मांगी बिना शर्त माफी, अवमानना नोटिस वापस लेने की अपील

Supreme Court Contempt Case: CJP प्रदर्शन के दौरान पाबंदियों को लेकर अवमानना मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना से इनकार करते हुए अवमानना नोटिस वापस लेने की अपील की।
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police officer molestation case

महिला पत्रकार की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुरक्षा का आदेश Photo Source@ANI

Delhi Police Commissioner Anurag Kumar; कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों को लेकर अवमानना मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी है। उन्होंने अदालत में दो हलफनामे दाखिल कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का जानबूझकर या सोच-समझकर उल्लंघन नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने अदालत से अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस वापस लेने की अपील की है।

ये हलफनामे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष दाखिल किए गए हैं। पुलिस कमिश्नर ने प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट, मेट्रो सेवाओं और प्रदर्शनकारियों को हटाने से जुड़ी कार्रवाई का पक्ष रखते हुए पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया।

4 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट बंद करने का दावा

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रतिबंधों के दौरान केवल मोबाइल नेटवर्क के जरिए मिलने वाली इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई थीं। यह कदम रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में उठाया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई।

57 से घटाकर 45 मेट्रो स्टेशनों पर लगाई गई थीं पाबंदियां

हलफनामे के अनुसार, 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेट्रो स्टेशनों पर लगाई गई पाबंदियों का दायरा कम किया गया था। पहले दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 57 पर प्रतिबंध लगाए गए थे, जिन्हें घटाकर 45 स्टेशन कर दिया गया। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बहाल कर दी गई थीं।

हटाए गए लोगों को 2 से 6 घंटे में छोड़ा गया

पुलिस कमिश्नर ने हलफनामे में कहा कि प्रदर्शन स्थल से हटाए गए लोगों को दो से छह घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया था। उनके मुताबिक, इन लोगों को गर्म, ताजा और अच्छा भोजन भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजनीतिक नेताओं को संबंधित थाना प्रभारियों (SHO) के कक्षों में बैठाया गया था। हलफनामे में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर कोई नोटिस चिपकाया नहीं गया था।

CJP के मार्च में 240 से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने CJP के 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस मार्च के दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस की ओर से यह तथ्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को सामने रखने के लिए हलफनामे में शामिल किया गया।

अवमानना नोटिस वापस लेने की मांग

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त और पूर्ण माफी स्वीकार करने तथा उनके खिलाफ जारी अवमानना नोटिस से मुक्त करने की अपील की है। उन्होंने दोहराया कि अदालत के आदेशों का कोई जानबूझकर या जानबूझकर किया गया उल्लंघन नहीं हुआ। मामले में अब सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा। पुलिस कमिश्नर की ओर से माफी मांगना और नोटिस वापस लेने का अनुरोध करना अपने आप में यह नहीं दर्शाता कि अदालत ने उनकी दलीलें स्वीकार कर ली हैं। अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।

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