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संविधान ही सर्वोच्च, तीनों स्तंभ मिलकर कार्य करें: सीजेआइ

सम्मान समारोह: केशवानंद भारती केस का भी उल्लेख मुंबई. भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) बीआर गवई ने रविवार को स्पष्ट किया कि न्यायपालिका, कार्यपालिका या विधायिका में कोई भी सर्वोच्च नहीं, बल्कि सिर्फ संविधान ही सर्वोच्च है। मुंबई में महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि देश […]

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May 20, 2025
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस बी. आर. गवई (Photo : ANI)

सम्मान समारोह: केशवानंद भारती केस का भी उल्लेख

मुंबई. भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) बीआर गवई ने रविवार को स्पष्ट किया कि न्यायपालिका, कार्यपालिका या विधायिका में कोई भी सर्वोच्च नहीं, बल्कि सिर्फ संविधान ही सर्वोच्च है। मुंबई में महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि देश के तीनों संवैधानिक अंगों को संविधान के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

सीजेआइ गवई ने कहा कि केशवानंद भारती केस में आए फैसले ने देश के तीनों स्तंभों को संतुलित ढंग से कार्य करने में मदद की है। उन्होंने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका को सुचारू रूप से काम करने में मदद मिली है।’ गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद को सर्वोच्च बताते हुए न्यायपालिका पर ‘सुपर पार्लियामेंट’ बनने का आरोप लगाया था।

महाराष्ट्र के अफसरों को प्रोटोकॉल का पाठ

सीजेआइ गवई ने महाराष्ट्र में रविवार को अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सीजेआइ के दौरे पर मुख्य सचिव, डीजीपी व पुलिस आयुक्त जैसे अधिकारियों का न रहना न्यायपालिका के प्रति सम्मान की कमी दर्शाता है। सीजेआइ ने स्पष्ट किया कि प्रोटोकॉल नया विषय नहीं, संवैधानिक संस्थाओं के बीच परस्पर सम्मान का मामला है।

Published on:
20 May 2025 12:41 am
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