
बालोद जिले के सबसे पुराने और बड़े मवेशी बाजारों में शामिल करहीभदर बाजार को प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक बंद कर दिया है। गौ सेवा एवं गौरक्षा संगठनों की शिकायत पर हुई जांच में पशु क्रूरता, अवैध परिवहन, कानून-व्यवस्था संबंधी खतरे और नीलामी से प्राप्त आय के उपयोग में अनियमितताओं के तथ्य सामने आए हैं। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने बाजार बंद करने के साथ आय का जिला स्तरीय ऑडिट कराने और पुलिस निगरानी के निर्देश दिए हैं।
आदेश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 और छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम का उल्लेख किया गया है। बाजार को दोबारा संचालित करने के लिए न्यायालय की लिखित अनुमति अनिवार्य की गई है।
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गौ सेवा एवं गौरक्षा संगठनों ने शिकायत की थी कि प्रत्येक सोमवार लगने वाले बाजार में पशु क्रूरता और अवैध परिवहन होता है। इसके बाद 13 मई को जांच समिति गठित की गई। अतिरिक्त तहसीलदार बालोद की अध्यक्षता वाली समिति में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं और थाना प्रभारी बालोद को सदस्य बनाया गया।
समिति ने 22 जून को सरपंच, पटवारी और ग्रामीणों की मौजूदगी में निरीक्षण किया। सरपंच और बाजार संचालक ने आरोपों से इनकार करते हुए बाजार बंद नहीं करने का आग्रह किया था। हालांकि, समिति ने 3 जुलाई को संयुक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। एसडीएम और अपर कलेक्टर की अनुशंसा के बाद प्रकरण अंतिम आदेश के लिए कलेक्टर के समक्ष भेजा गया।
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उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. डीके सिहारे ने प्रतिवेदन में बताया कि बाजार गांव के बीच संचालित होने से आवागमन और यातायात बाधित होता है। अधिक संख्या में पशुओं के एकत्र होने से पशुओं और लोगों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि पशुओं को बांधकर रखने की जगह पर छाया और पानी की व्यवस्था नहीं है। धूप में घंटों खड़े रहने वाले पशुओं के साथ यह व्यवहार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(1)(एच) के दायरे में आता है। इसके अलावा वाहनों में क्षमता से अधिक पशुओं को ठूंसकर लाने से दम घुटने और उनकी मौत का खतरा रहता है।
थाना प्रभारी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 से 2023 के बीच बालोद, गुरुर, सनौद और रनचिरई थानों में बाजार से संबंधित कुल 50 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें पशु क्रूरता अधिनियम, पशु परिरक्षण अधिनियम और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66/192 के तहत मामले शामिल हैं। प्रकरणों में जिले के अलावा अन्य जिलों और राज्यों के लोग भी शामिल रहे हैं।
जांच समिति ने माना कि इन मामलों के कारण समय-समय पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे की आशंका बनी रहती है, जिसका असर आसपास के गांवों पर भी पड़ता है।
जनपद पंचायत से मिले छह वर्षों के आय-व्यय विवरण में नीलामी से हर साल लाखों की आय की जानकारी सामने आई। बावजूद बाजार में पशुओं के लिए बाड़ा, शेड और दाना-पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार आय का अधिकांश हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, पेयजल और सड़क-नाली निर्माण जैसे कार्यों में दर्शाया गया है। वहीं, वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2024-25 में ठेकेदार को दी गई छूट से संबंधित स्पष्ट ऑडिट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने जांच प्रतिवेदन से सहमति जताते हुए आवश्यक सुविधाओं के अभाव, वित्तीय अनियमितताओं और कानून-व्यवस्था संबंधी आशंकाओं को देखते हुए बाजार बंद करने का आदेश दिया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नीलामी से प्राप्त आय का जिला स्तरीय ऑडिट कराने एवं पुलिस अधीक्षक को बाजार पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।