भीलवाड़ा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अमरता केवल जीवन की निरंतरता नहीं, बल्कि वंश, संस्कार और आस्था की अखंड परंपरा है। संतान केवल परिवार का विस्तार नहीं, बल्कि उस कुल की अमरता का प्रसाद होती है। सनातन संस्कृति हजारों वर्षों से ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक चेतना की धारा […]
भीलवाड़ा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अमरता केवल जीवन की निरंतरता नहीं, बल्कि वंश, संस्कार और आस्था की अखंड परंपरा है। संतान केवल परिवार का विस्तार नहीं, बल्कि उस कुल की अमरता का प्रसाद होती है। सनातन संस्कृति हजारों वर्षों से ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक चेतना की धारा के रूप में समाज को दिशा देती आई है। “यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे” की भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मानव और ब्रह्मांड में कोई अंतर नहीं है, दोनों एक ही चेतना के विस्तार हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव गुरुवार को भीलवाड़ा के हरिशेवा धाम में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव व दीक्षा दान समारोह में मौजूद समस्त संतों व श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
संत परंपरा और देवत्व का अनुभव
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि संत समाज सनातन संस्कृति के जीवंत स्तंभ हैं। उनके माध्यम से समाज को देवत्व का साक्षात्कार होता है। उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि दिव्य दृष्टि हर किसी को नहीं मिलती, किंतु संतों के सान्निध्य में आस्था और श्रद्धा के माध्यम से ईश्वर की अनुभूति संभव है। ऐसे दिव्य व्यक्तित्वों का सान्निध्य स्वयं में आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है।
कुंभ 2028 : आध्यात्मिक चेतना का महापर्व
मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री ने वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक पुनर्जागरण का अवसर है। भारतीय कालगणना की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि हमारी संस्कृति सूर्य, राशियों और नक्षत्रों के आधार पर समय की गणना करती है, जो विश्व के लिए अद्भुत है। उन्होंने कहा कि कुंभ में स्नान केवल जल में डुबकी लगाना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, नवचेतना और प्रकृति से पुनः जुड़ने का प्रतीक है।
सांस्कृतिक धरोहर और आस्था का पुनर्जागरण
उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक आक्रमणों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक चेतना अडिग रही है। उन्होंने सोमनाथ महादेव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंदिर सनातन आस्था की अटूट शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण की लीला स्थलों के संरक्षण और विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं , चित्रकूट धाम और उज्जैन महाकाल मंदिर जैसे स्थलों का विकास इसी संकल्प का परिणाम है।
राजस्थान और मध्यप्रदेश : राम परंपरा का सांस्कृतिक संगम
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से राजस्थान और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एकता का उल्लेख करते हुए कहा कि “रा” से राजस्थान और “म” से मध्यप्रदेश को जोड़ें तो यह राम परंपरा की स्मृति को जागृत करता है। यह केवल भाषाई संयोग नहीं, बल्कि साझा आस्था, इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और भगवान राम की मर्यादा तथा सनातन मूल्यों से प्रेरित है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सांस्कृतिक गौरव
मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को पुनर्स्थापित कर विश्व में नई पहचान बना रहा है। यादव ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आस्था को सुदृढ़ करते हैं और सनातन संस्कृति की चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। “जय श्री महाकाल” और “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ उन्होंने अपने उद्बोधन का समापन किया।
समारोह में सहकारिता विभाग के मंत्री गौतम दक, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, सांसद दामोदर अग्रवाल ने भी सनातन संस्कृति के विषय पर विचार व्यक्त किये। समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित अन्य अतिथियों का उपरणा ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
इससे पूर्व हेलीपैड पहुंचने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू , अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारस जैन ने बुके देकर स्वागत किया साथ ही पुलिस दल ने सलामी दी । इस अवसर पर वरिष्ठ जनप्रतिनिधि प्रशांत मेवाड़ा सहित बड़ी संख्या में संतगण, श्रद्धालु व आमजन मौजूद रहे।
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