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रतलाम कलेक्टर का बड़ा निर्णय, किसानों के उड़े होश

रतलाम। जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा हैं, इसके बावजूद, सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक खेत आगजनी की 163 घटनाएं दर्ज हो गई हैं। इस पर कलेक्टर ने बड़ा निर्णय लिया, जिससे किसानों को होंश उड़ गए हैं। प्रशासन ने नरवाई जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्ती दिखाते […]

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सेटेलाइट से जिले में 163 खेत में आगजनी की घटना की पुष्टि, नरवाई जलाने पर 25200 रुपए का अर्थदंड, कृषि विभाग कर रहा किसानों को जागरूक

रतलाम। जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा हैं, इसके बावजूद, सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक खेत आगजनी की 163 घटनाएं दर्ज हो गई हैं। इस पर कलेक्टर ने बड़ा निर्णय लिया, जिससे किसानों को होंश उड़ गए हैं।

प्रशासन ने नरवाई जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए कुल 25,200 रुपए का अर्थ दंड लगाया है। शेष प्रकरणों पर भी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। निपटने के लिए किसानों द्वारा लगाई जा रही आग को रोकने के लिए जिला प्रशासन, कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।

ऐसे करें नवराई प्रबंधन
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास आरके सिंह ने बताया कि किसानों को जागरूक करने और प्रदर्शनों के माध्यम से प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से जिले में 300 किट बायो डीकंपोजर वितरित किए गए हैं। दूसरी तरफ खेतों में आए दिन आगजनी की घटनाएं घटित हो रही हैं। जिस पर अमला नजर रखे हुए, साथ ही कंट्रोल रूम पर भी शिकायतें मिलने पर घटना का मौका मुआयना किया जा रहा हैं।

इन उपयोगी यंत्रों का प्रदर्शन
नरवाई प्रबंधन में उपयोगी यंत्रों के विषय में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे जिले में प्रदर्शन आयोजित किए गए। किसानों के खेतों में पहुंचकर नरवाई प्रबंधन में उपयोगी यंत्रों जैसे मल्चर, देशी पाटा और रिवर्सिबल प्लाऊ के उपयोग हेतु प्रेरित किया जा रहा है।

किसान ने किया उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत
ग्राम पलसोड़ा के किसान महेंद्रसिंह आंजना ने देशी पाटा का उपयोग कर अपने 30 बीघा खेत में नरवाई का सफल प्रबंधन कर एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रशासन ने किसानों से आग्रह किया है कि वे फसलों के अवशेष को जलाने के बजाय आधुनिक तरीकों से खाद में परिवर्तित कर मृदा की उर्वरकता बढ़ाएं। इससे बहुमूल्य मृदा का क्षरण रुकेगा, मृदा के पोषक तत्व संरक्षित होंगे और उसकी जलधारण क्षमता में वृद्धि होगी। प्रशासन ने जलवायु अनुकूल खेती की ओर एक कदम बढ़ाने का आह्वान किया है।