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Opinion : बढ़ता वजन, घटती सेहत

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार, भारत में 23 प्रतिशत महिलाएं और 22.1 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन वाले हैं। भारत के शहरी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही है, जहां लोग प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और खाने में अधिक तेल का सेवन करते हैं।

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Feb 07, 2025

देवेन्द्रराज सुथार
बढ़ता मोटापा आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इसका स्वास्थ्य, समाज और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। द लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग मोटापे से ग्रस्त थे, जिनमें 878 मिलियन वयस्क शामिल थे। यह संख्या हर साल बढ़ रही है, जिससे यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही है। भारत भी इस वैश्विक प्रवृत्ति से अछूता नहीं है और यहां भी मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।

हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समस्या के लिए खाना पकाने के तेल के अत्यधिक सेवन को एक प्रमुख कारण बताया और इसे रोकने के लिए कुछ उपाय सुझाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि खाना पकाने में तेल के अत्यधिक उपयोग से मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार, भारत में 23 प्रतिशत महिलाएं और 22.1 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन वाले हैं। भारत के शहरी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही है, जहां लोग प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और खाने में अधिक तेल का सेवन करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, शहरी भारतीय प्रतिदिन औसतन 32.6 ग्राम तेल और घी खाते हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन 20 ग्राम तेल और घी खाना चाहिए। नतीजतन, शहरी क्षेत्रों में मोटापे की दर तेजी से बढ़ी है और यह अब महामारी के रूप में फैल रही है।

मोटापे के साथ-साथ बीमारियों की बढ़ती दर भी चिंता का विषय बन गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मोटापा मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। 2019 में भारत में हुए एक अध्ययन से पता चला कि भारत में लगभग 77 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। यह अध्ययन 1990 से 2019 के बीच भारत में मधुमेह से संबंधित रुझानों पर आधारित था। भारत में मोटापे और इससे होने वाली बीमारियों की बढ़ती घटनाओं ने स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव डाला है और स्वास्थ्य व्यय में भी वृद्धि की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए खाना पकाने के तेल की खपत को कम करने की बात कही है। उनका कहना है कि घरों में अत्यधिक तेल की खपत एक बड़ी समस्या बन गई है और इसे कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए। उनका सुझाव है कि अगर कोई परिवार हर महीने दो लीटर तेल का इस्तेमाल करता है, तो उसे कम से कम 10 फीसदी कम करना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह कदम व्यावहारिक और सटीक है, क्योंकि तेल में उच्च कैलोरी होती है और इसके अधिक सेवन से शरीर में वसा का स्तर बढ़ता है। यह सलाह न केवल मोटापे को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है, बल्कि इससे मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से शारीरिक गतिविधि बढ़ाने की भी अपील की है। वे चाहते हैं कि लोग रोजाना व्यायाम करें और अपने खान-पान में संतुलन बनाए रखें। शारीरिक गतिविधि बढ़ाने से वजन को नियंत्रित किया जा सकता है और इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मोटापे की समस्या को कम किया जा सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि हर दिन सिर्फ 30 मिनट टहलने से हृदय की सेहत में सुधार होता है। सिर्फ तीस मिनट की सैर से हड्डियां मजबूत हो सकती हैं। इससे शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम हो सकती है और मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ सकती है। 30 मिनट की सैर आपके शरीर के लिए जादू की तरह काम करती है। इससे हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और कुछ कैंसर जैसी बीमारियों के होने का खतरा कम हो सकता है।

मोटापे और इससे होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए सिर्फ खाना पकाने के तेल का सेवन कम करना ही काफी नहीं होगा। इसके साथ-साथ हमें अपने आहार में संतुलन भी बनाना होगा। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचना जरूरी है, क्योंकि इन खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में चीनी, नमक, वसा और कैलोरी होती है, जो मोटापे का मुख्य कारण बनती हैं। शोध से यह साबित हुआ है कि प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन वजन बढ़ने का कारण बनता है। इसके बजाय लोगों को ताजे फल, सब्जियों, अनाज और प्रोटीन से भरपूर आहार को अपनाना चाहिए, जो उनके शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं।

भारत में सरकारी स्तर पर भी इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। जैसे कि 2018 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं में पोषण स्तर को बेहतर बनाना है। इसके अलावा सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से लोगों को स्वस्थ आहार और जीवनशैली के बारे में जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाए हैं। फिर भी यह समस्या इतनी बड़ी है कि इसे केवल सरकारी प्रयासों से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए हमें समाज के हर वर्ग को इस दिशा में जागरूक करने की आवश्यकता है।

मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली में बदलाव करें। खाना पकाने के तेल के अत्यधिक सेवन को नियंत्रित करके, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाकर और संतुलित आहार अपनाकर हम इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करती है। इस समस्या से निपटने के लिए यह जरूरी है कि हम व्यक्तिगत स्तर पर भी जिम्मेदारी लें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

Published on:
07 Feb 2025 06:11 pm
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