‘सस्टेनेबिलिटी ऑन व्हील्स’ से मौके पर हुआ कचरे का लाइव प्रोसेसिंग डेमो
ग्वालियर। शहर में जहां एक ओर कचरा प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं, वहीं स्वच्छ भारत यात्रा ने ग्वालियर पहुंचकर यह स्पष्ट कर दिया कि समाधान मौजूद हैं—बस जरूरत है इच्छाशक्ति और जनभागीदारी की। तेलंगाना से आए स्वच्छ भारत यात्रा दल ने मंगलवार को नगर निगम आयुक्त संघप्रिय एवं अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव से मुलाकात कर कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी पर आधारित ठोस व व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्रों, आम नागरिकों और नगर निगम कर्मचारियों को प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग, कचरे के पृथक्करण और व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के लिए जागरूक किया गया। दल ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक नागरिक स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक कोई भी शहर स्वच्छ नहीं बन सकता।
स्वच्छ भारत यात्रा के सदस्यों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि लोगों को कार्रवाई के लिए प्रेरित करना और कचरा-मुक्त भविष्य के व्यावहारिक समाधान मौके पर दिखाना है। इसी सोच के साथ यह यात्रा देशभर के विभिन्न शहरों में निरंतर आगे बढ़ रही है।
कचरा वहीं, समाधान भी वहीं: मोबाइल यूनिट ने खोली आंखें
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और प्रभावशाली हिस्सा रहा ‘सस्टेनेबिलिटी ऑन व्हील्स’, जो अपनी तरह की पहली मोबाइल कचरा प्रोसेसिंग यूनिट है। इस यूनिट के माध्यम से कचरे की रियल-टाइम प्रोसेसिंग कर दिखाई गई।
गीले कचरे से खाद बनाना, सूखे रीसायक्लेबल कचरे की गांठ तैयार करना, थर्मोकोल को लंप में बदलना, सैनिटरी पैड का सुरक्षित निस्तारण और कठोर प्लास्टिक को टुकड़ों में काटकर प्रोसेस करना—इन सभी प्रक्रियाओं का लाइव डेमो दिया गया, जिसने मौजूद लोगों को खासा प्रभावित किया।
सफाई सिर्फ निगम की नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी
स्वच्छ भारत यात्रा के सदस्यों ने छात्रों, आम नागरिकों, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों और नगर निगम कर्मचारियों के साथ मिलकर सफाई गतिविधियों में भी भाग लिया। प्लास्टिक कचरा एकत्र कर यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएगा।