नेशनल लोक अदालत में शनिवार को सालों से अलग-अलग रह रहे तीन परिवार फिर से एक-दूजे के साथ रहने तैयार हो गए, तो वहीं परिवार के बीच चल रहे संपत्ति बंटवारे का विवाद भी सुलझ गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष मिश्रा की अदालत में पति-पत्नी के बीच पिछले 6 साल से तलाक का एक मामला चल रहा था।
सागर. नेशनल लोक अदालत में शनिवार को सालों से अलग-अलग रह रहे तीन परिवार फिर से एक-दूजे के साथ रहने तैयार हो गए, तो वहीं परिवार के बीच चल रहे संपत्ति बंटवारे का विवाद भी सुलझ गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष मिश्रा की अदालत में पति-पत्नी के बीच पिछले 6 साल से तलाक का एक मामला चल रहा था। जिसमें 2016 में शादी होने के बाद पति नौकरी के लिए विदेश चला गया, लेकिन जब वह लौटकर आया तो पत्नी से दूरी बना ली और फिर कर्नाटक नौकरी करने चला गया। पति-पत्नी 2018 से अलग-अलग रह रहे थे। न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद समझाइश दी और सुलहवार्ता कराई, जिसके बाद उनके बीच राजीनामा हो गया और दोनों एक साथ रहने तैयार हो गए।
- लड़कियां हुई तो पति ने छोड़ दिया था
लोक अदालत में दो ऐसे मामलों में सुलह हुई जहां दूसरी बेटी होने के बाद सालों से पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे थे। एक मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल सोनी की अदालत में था, जिसमें दूसरी बेटी होने के बाद पति ने 2020 में उसे छोड़ दिया था। वहीं दूसरा मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट रीना शर्मा की अदालत में घरेलू हिंसा और भरण-पोषण का लंबित था, जिसमें एक लड़की होने के बाद दूसरी बार गर्भावस्था के 5 माह में जैसे पति को पता चला कि गर्भ में बेटी है तो उसने पत्नी को छोड़ दिया था। न्यायालय की मध्यस्थता से दोनों मामले सुलझ गए और पति-पत्नी साथ रहने तैयार हो गए।
- 15 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित
शनिवार को प्रधान जिला न्यायाधीश महेश कुमार शर्मा ने नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश व को-आर्डिनेटर लोक अदालत प्रदीप सोनी, सचिव दिनेश सिंह राणा सहित न्यायालयों के न्यायाधीश, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजपूत सहित अधिवक्ता, न्यायालय के कर्मचारी आदि उपस्थित रहे। नेशनल लोक अदालत के लिए जिले में कुल 50 खंडपीठों का गठन किया गया था, जिनमें शनिवार को 3042 प्रकरणों का निराकरण किया गया। 1398 प्रकरण व प्री-लिटिगेशन के 1644 प्रकरणों का निराकरण राजीनामा के आधार पर किया गया। मोटर दुर्घटना के 87 प्रकरणों का निराकरण कर 1.30 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति राशि के अवार्ड पारित किए। चैक बाउंस के 319 मामलों मं 8.10 करोड़ रुपए, आपराधिक प्रकृति के शमन योग्य 533 प्रकरण, बिजली कंपनी के 158, पारिवारिक विवाद के 86, दीवानी व अन्य प्रकृति के 43 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के 107, बिजली कंपनी 470, नगर निगम के 220, ई-चालान के 709 के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण कर 2.69 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।
प्रधान जिला न्यायाधीश महेश कुमार शर्मा ने नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश व को-आर्डिनेटर लोक अदालत प्रदीप सोनी, सचिव दिनेश सिंह राणा सहित न्यायालयों के न्यायाधीश, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजपूत सहित अधिवक्ता, न्यायालय के कर्मचारी आदि उपस्थित रहे। नेशनल लोक अदालत के लिए जिले में कुल 50 खंडपीठों का गठन किया गया था, जिनमें शनिवार को 3042 प्रकरणों का निराकरण किया गया। 1398 प्रकरण व प्री-लिटिगेशन के 1644 प्रकरणों का निराकरण राजीनामा के आधार पर किया गया। मोटर दुर्घटना के 87 प्रकरणों का निराकरण कर 1.30 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति राशि के अवार्ड पारित किए। चैक बाउंस के 319 मामलों मं 8.10 करोड़ रुपए, आपराधिक प्रकृति के शमन योग्य 533 प्रकरण, बिजली कंपनी के 158, पारिवारिक विवाद के 86, दीवानी व अन्य प्रकृति के 43 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के 107, बिजली कंपनी 470, नगर निगम के 220, ई-चालान के 709 के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण कर 2.69 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।