केंद्रीय बजट पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार के जिन तीन कर्तव्यों की चर्चा की उसमें वैश्विक परिस्थितियों का सामना करते हुए आर्थिक विकास को तेज व सतत बनाए रखने, जनआकांक्षाओं को पूरा करने व संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक सबकी पहुंच की बात कही। इन्हीं कर्तव्यों को ध्यान में रखकर उन्होंने […]
केंद्रीय बजट पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार के जिन तीन कर्तव्यों की चर्चा की उसमें वैश्विक परिस्थितियों का सामना करते हुए आर्थिक विकास को तेज व सतत बनाए रखने, जनआकांक्षाओं को पूरा करने व संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक सबकी पहुंच की बात कही। इन्हीं कर्तव्यों को ध्यान में रखकर उन्होंने बजट पेश करने का दावा भी किया। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने का उद्देश्य रखते हुए ही बजट में विकास, रोजगार, आत्मनिर्भरता, गरीबी कम करना और वैश्विक चुनौतियों से निपटने जैसे बिंदुओंं पर जोर दिया गया है।
वित्त मंत्री ने यह बजट ऐसे दौर में पेश किया है जब टैरिफ के दबाव के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर दूसरे कारणों से व्यापारिक उथल-पुथल का सिलसिला जारी है। ऐसे माहौल में वैश्विक व्यापार और निवेश को आकर्षित करना बड़ी चुनौती है। इसीलिए विदेशी निवेश को भारत की बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं के साथ जोडऩे के लिए वित्त मंत्री ने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने की योजना बनाने की बात कही है। भारतीय इकॉनोमी की रीढ़ की हड्डी समझे जाने वाले एमएसएमइ सेक्टर के लिए ‘एमएसएमइ विकास निधि’ का प्रावधान भी औद्योगिक प्रोत्साहन की दिशा में ठोस कदम कहा जा सकता है। इससे एमएसएमइ सेक्टर और मजबूत होगा। बायोफॉर्मा शक्ति को महसूस करते हुए बजट में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए इको-सिस्टम का निर्माण करने की बात कही गई है। टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ माइनिंग में निवेश बढ़ाने की घोषणा को भारत को वैश्विक टेक हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम ही कहा जाएगा। उच्च-मूल्य कृषि पर बजट का विशेष जोर है। साथ ही ग्रामीण और उप-शहरी रोजगार बढ़ाने के लिए पशुपालन में उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। रक्षा व्यय बढ़ाकर सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि सुरक्षा के मामले पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। शुगर व कैंसर की दवा सस्ती करने को भी आम आदमी को राहत पहुंचाने वाला कहा जाएगा। लेकिन चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में काफी कुछ करने की आवश्यकता थी। बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। क्योंकि आम आदमी की जेब में रकम तब ही पहुंच पाती है जब रोजगार के अवसर भी बढ़ें। सही मायने में दीर्घकालीन उद्देश्यों को लेकर उठाए गए तमाम कदम भविष्य के विकास की राह भी खोलने वाले होते हैं।
मोटे तौर पर बजट में सरकार ने रिफॉर्म पर जोर दिया है लेकिन जिस ‘रिफॉम्र्स एक्सप्रेस’ का दावा किया जा रहा है वह भी कोई जादुई चिराग नहीं हो सकता। रिफॉम्र्स वस्तुत: एक सतत प्रकिया है। सही मायने में विकास की रफ्तार को टॉप गियर में डालने के सरकार के प्रयास तब ही सफल होंगे जबकि बजट में तय किए गए लक्ष्यों को पाने की रफ्तार भी तेज हो।