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केवल डिग्रीधारी नहीं कुशल नागरिक भी बनें हमारे युवा

आज आवश्यकता इस बात की है कि हर युवा अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कोई न कोई कौशल अवश्य विकसित करे। डिजिटल साक्षरता, वित्तीय प्रबंधन, संचार कौशल, भाषा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा स्थानीय कला और शिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। जब इन कौशलों के साथ नवाचार और उद्यमिता की भावना जुड़ती है, तब नए उद्योग स्थापित होते हैं, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।
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Jul 14, 2026
FutureOfWork
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प्रो. हेमंत पारीक,
(लेखक इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज के जनरल सेक्रेटरी हैं
)

विश्व युवा कौशल दिवस हर वर्ष 15 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य युवाओं को यह संदेश देना है कि केवल औपचारिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बदलते समय के अनुरूप कौशल, नवाचार और उद्यमिता का विकास भी उतना ही आवश्यक है। वर्तमान युग ज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग है, जहां वही व्यक्ति और वही राष्ट्र आगे बढ़ते हैं जो निरंतर सीखते हैं, नए विचारों को अपनाते हैं और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता रखते हैं। इसलिए आज कौशल केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बन चुका है।
भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। यदि हमारे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ व्यवहारिक कौशल, रचनात्मक सोच और उद्यमिता की भावना से जोड़ा जाए तो वे न केवल अपने लिए रोजगार के अवसर सृजित करेंगे, बल्कि अनेक अन्य लोगों को भी आजीविका उपलब्ध करा सकेंगे। यही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति होगी।

अवसरों के सृजन का समय
आज का समय केवल नौकरी खोजने का नहीं, बल्कि अवसरों का सृजन करने का है। एक कुशल युवा सीमित संसाधनों में भी अपनी प्रतिभा के बल पर नई दिशा दे सकता है। डिजिटल तकनीक, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, हस्तशिल्प, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकी तथा सामाजिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में अनेक युवाओं ने अपने विचारों को सफल उद्यम में बदलकर यह सिद्ध किया है कि नवाचार किसी बड़े शहर या बड़ी पूंजी का मोहताज नहीं होता, बल्कि नई सोच, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का परिणाम होता है।

कौशल और नवाचार से संभव है परिवर्तन
हमारे देश में अनेक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। श्रीधर वेम्बु ने ग्रामीण क्षेत्रों से तकनीकी सेवाओं का विस्तार कर यह सिद्ध किया कि विश्वस्तरीय कार्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। अरुणाचलम मुरुगनन्थम ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या को समझते हुए कम लागत वाली सेनेटरी नैपकिन निर्माण मशीन विकसित की और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। राजस्थान सहित देश के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, दुग्ध उत्पादन तथा अन्य लघु उद्यमों के द्वारा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ये उदाहरण बताते हैं कि कौशल और नवाचार समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकते हैं।

कौशल विकसित करने की आवश्यकता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी शिक्षा को कौशल, अनुभवात्मक अधिगम और उद्यमिता से जोडऩे पर विशेष बल देती है। विद्यार्थियों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रखकर प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, अनुसंधान, स्थानीय उद्योगों से जुड़ाव तथा व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने पर जोर दिया गया है। इससे युवाओं में समस्या समाधान, नेतृत्व, संवाद, सहयोग और निर्णय लेने जैसी जीवनोपयोगी क्षमताओं का विकास होता है। यही गुण उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाते हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हर युवा अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कोई न कोई कौशल अवश्य विकसित करे। डिजिटल साक्षरता, वित्तीय प्रबंधन, संचार कौशल, भाषा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा स्थानीय कला और शिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। जब इन कौशलों के साथ नवाचार और उद्यमिता की भावना जुड़ती है, तब नए उद्योग स्थापित होते हैं, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।

क्षमता का राष्ट्र हित में करे उपयोग
विश्व युवा कौशल दिवस हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम अपने युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि कुशल, नवाचारी, आत्मनिर्भर और उत्तरदायी नागरिक बनाएं। यदि हर युवा अपनी क्षमता को पहचानकर उसे समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग करे, तो विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से साकार होगा। कौशल व्यक्ति को आत्मविश्वास देता है, नवाचार उसे नई पहचान देता है और उद्यमिता उसे समाज में परिवर्तन का माध्यम बनाती है। यही विश्व युवा कौशल दिवस का वास्तविक संदेश है और यही भारत के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग भी।

Updated on:
14 Jul 2026 06:42 pm
Published on:
14 Jul 2026 06:42 pm