दिल्ली में 16-20 फरवरी तक होने वाला 'इंडिया-एआई इम्पैक्ट' समिट भारत की उभरती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। एआई के बढ़ते उपयोग, संभावनाओं और जोखिमों पर चर्चा करते हुए यह समिट जिम्मेदार, सुरक्षित और टिकाऊ एआई रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
दुनिया में आज भारत की भूमिका बेहद सफल उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में है। इतना ही नहीं, वैश्विक मामलों में भी भारत की भूमिका पिछले वर्षों में अहम होने लगी है। दुनिया के सबसे बड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) में से एक 'इंडिया-एआइ इम्पैक्ट' समिट की मेजबानी को भी इसी भूमिका के रूप में देखा जा सकता है। दिल्ली में 16-20 फरवरी तक होने वाले इस समिट में दुनियाभर के बड़े नेता और बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ जुट रहे हैं। एआइ से उद्योग, समाज और अर्थव्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहे भारत और दुनिया के तमाम देशों के लिए यह समिट एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि एआइ के उपयोग की रफ्तार हर क्षेत्र में तेजी से होने लगी है। बैंकिंग, बीमा, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य सेवाएं, मौसम, रक्षा, आइटी सेवाएं, शिक्षा और खेती आदि तक में एआइ का इस्तेमाल तेजी से होने लगा है। एआइ की अपार संभावनाओं के बीच इससे जुड़े जोखिम भी कम नहीं है। ऐसे में उम्मीद यही की जा रही है कि इस समिट में भी एआइ के इस्तेमाल से जुड़े उन खतरों पर भी चर्चा होगी जो न केवल सामाजिक, बल्कि राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था के सामने भी नई चुनौती के रूप में सामने आई है। अमरीका और चीन जैसे देश एआइ के इस्तेमाल में काफी आगे हैं।
भारत को इन महाशक्तियों के बीच जब एआइ समिट की मेजबानी का मौका मिले तो यह भी सहज अंदाजा हो जाता है कि एआइ के सकारात्मक उपयोग की पहल में भारत भी अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो चुका है। यह भी सच है कि एआइ ने जहां रचनात्मकता और सूचना प्रसार को नई गति दी है पर इसके दुरुपयोग के खतरे भी अपनी जगह हैं। इसीलिए भारत समेत दुनिया के कई देशों में लागू आइटी कानून में इन खतरों से निपटने की जरूरत को समझते हुए जरूरी प्रावधान किए जा रहे हैं। मोटे अनुमान के अनुसार वर्ष 2032 तक भारत में एआइ का बाजार 13.1 लाख करोड़ डॉलर होने की उम्मीद है। क्योंकि भारतीय कंपनियां अपने कामकाज व समस्याओं के समाधान के काम में एआइ टूल्स को शामिल कर रही हैं।
इस समिट में दुनियाभर के नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स, छात्रों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक साथ लाने का मकसद भी यही है, ताकि एक जिम्मेदार और टिकाऊ एआइ रोडमैप तैयार किया जा सके। भारत हमेशा यही कहता रहा है कि एआइ को अपनाने का उद्देश्य मानव श्रम का विकल्प तलाशना कतई नहीं है, बल्कि मानवीय क्षमताओं को इसके माध्यम से बढ़ाया जाएगा।
एआइ से नए रोजगार, कौशल व अवसर सृजित होने की उम्मीदों के बीच डेटा संरक्षण भी बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। रोजगार संकट, सुरक्षा जोखिम व तकनीकी असमानता जैसी एआइ से जुड़ी चिंताओं का समाधान भी इस समिट से निकलेगा, यह उम्मीद की जानी चाहिए।