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जैसे को तैसा

संरक्षणवाद की नीति को बढ़ावा दे रहे अमरीका को अगर अपने हितों की चिंता है तो भारत को भी अपने हितों का ध्यान रखना पड़ेगा।

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Jun 24, 2018
donald trump,pm modi

इसे कहते हैं ‘जैसे को तैसा’। यानी ‘वार का जवाब पलटवार’ से। अमरीका ने स्टील पर 25 और एलुमिनियम पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाया तो भारत ने जवाब देते हुए वहां से आयातित 29 वस्तुओं पर 90 फीसदी तक शुल्क बढ़ाने में देरी नहीं की। बात सीधी और साफ है। ‘संरक्षणवाद’ की नीति को बढ़ावा दे रहे अमरीका को अगर अपने हितों की चिंता है तो भारत को भी अपने हितों का ध्यान रखना पड़ेगा। फिर भले वो हित सामरिक महत्त्व के हों या आर्थिक मोर्चे पर।

अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एक कारोबारी हैं। वे राज चलाते समय भी लाभ-हानि के गुणा-भाग से ऊपर नहीं उठ पाते। भारत ही नहीं अमरीका, चीन, कनाडा और यूरोपीय देशों के साथ भी इसी तरह की व्यापारिक नीति पर चल रहा है। भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पिछले कुछ सालों से वह अमरीका के व्यापारिक सहयोगियों की सूची में तेरहवें से नौवें स्थान पर पहुंच गया है। भारत इस समय अमरीका के साथ 1.3 लाख करोड़ रुपए के ‘ट्रेड सरप्लस’ में है। यानी भारत अमरीका से 1.71 लाख करोड़ रुपए मूल्य का सामान आयात करता है तो उसे 3.08 लाख करोड़ रुपए का माल निर्यात करता है।

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अमरीका की बड़ी चिंता यही है। वह चाहता है कि भारत निर्यात के मुकाबले अमरीका से आयात अधिक करे। इस महीने की शुरुआत में कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भी ट्रंप ने भारत पर उसके कुछ उत्पादों पर सौ फीसदी शुल्क लगाने का आरोप लगाया था। इसके बाद भारतीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु और अमरीकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस व्यापारिक मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमत हुए थे। लेकिन बात आगे बढ़ नहीं पाई। ‘ट्रेड वार’ में अमरीका को करारा जवाब देने के भारत के फैसले से देश में बने उत्पाद अब सस्ते पडऩे लगेंगे। आयातित सामान की तुलना में देश में निर्मित उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी।

अब करना यह होगा कि हमें अत्याधुनिक तकनीक विकसित कर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने होंगे जिससे कि ‘इंपोर्टेड’ को बेहतर मानने वालों का मानस भी स्वदेशी की ओर मोड़ा जा सके। यहां सवाल सिर्फ अमरीका का ही नहीं है। भारत को विश्व पटल पर अपने हितों को सर्वोपरि रखना होगा। चीन हो या अन्य यूरोपीय देश, ‘जैसे को तैसा’ वाली नीति हर जगह अपनानी होगी। अब वो दौर नहीं जब भारत को किसी पर निर्भर रहना पड़े। एकाध क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। अमरीका और दूसरे देशों को भी यह बात समझ लेनी चाहिए।

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Published on:
24 Jun 2018 10:09 am
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