ओपिनियन

दूरदृष्टा कुलिश जी: डॉलर का भ्रम और स्वाभिमान की चेतावनी

7 दिसंबर 1971 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित 'जहन्नुम में जाए डॉलर' आलेख
less than 1 minute read
Mar 10, 2026
Rajasthan Patrika
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

कुलिश जी के लेखन में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का विश्लेषण केवल आर्थिक तथ्य नहीं, बल्कि नैतिक दृष्टि से भी उपस्थित होता है। डॉलर आधारित सहायता व्यवस्था को वे एक ऐसे मायाजाल के रूप में देखते थे, जिसमें विकास के नाम पर निर्भरता और राजनीतिक दवाब छिपा रहता है। उनके मन में यह पीड़ा थी कि आर्थिक सहयोग की आड़ में शक्तिशाली राष्ट्र कमजोर देशों की नीतियों को प्रभावित करने लगते हैं और स्वाभिमान पर आंच आती हैं। भारत-पाक संघर्ष की पृष्ठभूमि में उनका लेखन आत्मसम्मान की पुकार बन जाता है, यह संदेश देते हुए कि राष्ट्र की गरिमा किसी की आर्थिक प्रलोभन से बड़ी होती है।