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प्रसंगवश: सरकारी स्कूलों में व्यवस्था सुधरे, तो और भी अच्छे आएंगे नतीजे

छत्तीसगढ़ बोर्ड की 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों ने जगाई उम्मीद की किरण। निजी के बजाय सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम बेहतर आए हैं।

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Chhattisgarh School

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीजी बोर्ड) की कक्षा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम गत दिवस घोषित किए गए। दोनों बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार हुआ है। दसवीं बोर्ड में जहां पिछले वर्ष 76.53 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल हुए थे, वहीं इस वर्ष 77.15 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की, जोकि 0.62 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, बारहवीं बोर्ड में पिछले वर्ष सफलता का प्रतिशत 81.87 प्रतिशत था, जो इस वर्ष 1.17 प्रतिशत बढ़कर 83.04 प्रतिशत रहा। बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में हुआ यह सुधार शैक्षणिक कार्यों में किए गए प्रयासों की वजह से है। इसमें एक खास बात यह है कि निजी के बजाय सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम बेहतर आए हैं।

सरकार अगर इसी तरह सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं में गुणात्मक सुधार के निरंतर प्रयास करे, तो और भी अच्छे नतीजे आगामी वर्षों में प्राप्त हो सकेंगे। क्योंकि सरकारी स्कूलों में अव्यवस्थाओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं की कमी की वजह से अध्ययन-अध्यापन ठीक से नहीं हो पाता है। वहीं, अशैक्षणिक कार्यों में शिक्षक-शिक्षिकाओं की ड्यूटी लगने से भी पढ़ाई प्रभावित होती है। इन सब वजहों से अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग हो गया है और वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए मजबूरन निजी स्कूलों की शरण में जा रहे हैं। निजी स्कूल वाले अभिभावकों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं और मनमानी फीस वसूली से लेकर तमाम तरह के शुल्क लेते हैं। निजी स्कूल एक तरह से शिक्षा की बजाय पैसे कमाने का जरिया बन गए हैं। निजी स्कूलों की चकाचौंध में अभिभावक फंसते जा रहे हैं।

सरकार अगर सरकारी स्कूलों का वैभव लौटाना चाहती है, तो उसे इनमें शैक्षणिक गतिविधियों पर ही ध्यान देना होगा। उनमें सुधार करना होगा। इससे सभी बच्चों को सस्ती और सुलभ शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। -अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com