बद्र समझौता: सहयोग की नई धुरी और भारत के सामने चुनौती
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Gulab Kothari Articles : माता-पिता शिशु के प्रति विशिष्ट दायित्वों का निर्वहन करते हैं। गर्भस्थ जीव का पोषणात्मक, भावनात्मक और संस्कारात्मक सम्बन्ध माता से रहता है। पिता का सम्बन्ध जाति, गोत्र और वंश परम्परा के रूप में जीव के साथ जुड़ता है। पिता की भूमिका माता की प्रतिस्पद्र्धी नहीं, बल्कि पूरक है। मां का प्यार, सुरक्षा और आत्मीयता बच्चे को जड़ों से जोड़ती है। पिता साहस, स्वतंत्रता और विजय के लिए पंख देता है। इसीलिए एक स्वस्थ संतान के निर्माण में माता-पिता दोनों का साहचर्य अपेक्षित है।