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रियल एस्टेट की गिरती कीमतें गहरे संकट का संकेत

। उनमें नजर आने वाली तस्वीर काफी खराब है। 2021 में कीमतों की चरम स्थिति के बाद से पूरे चीन में मकानों की कीमतें मोटे तौर पर 20 प्रतिशत गिर चुकी हैं। तीसरे और चौथे दर्जे के शहरों में यह गिरावट लगभग 30 प्रतिशत है।
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जयपुर

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Opinion Desk

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दाली

Sep 15, 2026

real estate

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बीस साल तक मैं लगातार चीन के रियल एस्टेट बाजार को लेकर निराशावादी रहा। मैं बार-बार कहता था कि मकानों की कीमतें बहुत ज्यादा हैं और हर बार गलत साबित होता था। कीमतें बढ़ती जातीं। मैं दामों में गिरावट की भविष्यवाणी करता और कीमतें फिर बढ़ जातीं। आखिरकार, जब पूरा देश रियल एस्टेट से पैसे कमा रहा था और मैं किनारे बैठकर तमाशा देखते-देखते थक गया तो 2021 में मैंने भी वही किया, जो मेरे आसपास के लोग पहले ही कर चुके थे।

मैंने भी रियल एस्टेट बाजार में निवेश करने के नजरिये से झुहाई में एक फ्लैट (कोंडो) खरीद लिया। किसी ने भी मुझे ऐसा करने से नहीं रोका, क्योंकि पूरा देश इस लोक-विश्वास पर चल रहा था कि चीनी प्रॉपर्टी में पैसा लगाने वाला कभी घाटे में नहीं रहता। लोग पूरी तरह आश्वस्त थे कि मकान की कीमत लगातार बढ़ती रहेगी और कीमतों में इजाफे से होने वाला फायदा बाकी सारी कमियों को बराबर कर देगा। अब वह लोक-विश्वास खत्म हो चुका है। चीन में संपत्ति रखने वाला लगभग हर व्यक्ति कीमतों को लगातार नीचे आते हुए देख रहा है। लोग एक-दूसरे को जो कहानियां सुना रहे हैं, उनका लहजा भी बदल चुका है। अब कोई इसे अस्थायी गिरावट नहीं कहता। लोग इसे स्थायी नुकसान मानने लगे हैं। पहले कीमतों में गिरावट के सरकारी आंकड़ों पर गौर फरमाइए। उनमें नजर आने वाली तस्वीर काफी खराब है। 2021 में कीमतों की चरम स्थिति के बाद से पूरे चीन में मकानों की कीमतें मोटे तौर पर 20 प्रतिशत गिर चुकी हैं। तीसरे और चौथे दर्जे के शहरों में यह गिरावट लगभग 30 प्रतिशत है। बीजिंग, शंघाई और शेनझेन जैसे बड़े शहरों में, जहां पूरे देश से लोग संपत्ति खरीदने आते हैं, कीमतें लगभग 10 प्रतिशत नीचे आ गई है। ये तो सरकारी आंकड़े हैं। लेकिन जब आप निजी तौर पर लोगों से बात करें तो आंकड़े और भी डरावने नजर आते हैं, क्योंकि डेवलपर्स पर सार्वजनिक रूप से एक सीमा से ज्यादा दाम घटाने पर पाबंदी है।

दिसंबर, 2016 में चीन के केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन में शी जिनपिंग ने कहा था- मकान रहने के लिए होते हैं, सौदेबाजी के लिए नहीं। अगस्त 2020 तक सरकार ने इस वक्तव्य को औपचारिक नीति में बदल दिया। इसके तहत जो नियम बनाए गए, उन्हें 'तीन लाल रेखाएं' कहा गया। इनमें से एक नियम के अनुसार किसी रियल एस्टेट कंपनी के ऊपर कर्ज की मात्रा उसकी अपनी पूंजी हिस्सेदारी के मुकाबले 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन उस समय शेयर बाजार में सूचीबद्ध औसत रियल एस्टेट कंपनी पर यह अनुपात करीब 140 प्रतिशत था। एवरग्रांडे उस समय इस संकट का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी थी। 2017 में उस पर यह अनुपात 240 प्रतिशत था और 2021 में भी यह 159 प्रतिशत था। इस साल अगस्त में एवरग्रांडे के संस्थापक को धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई लेकिन समस्या केवल एवरग्रांडे की नहीं थी। छोटी-बड़ी लगभग सभी रियल एस्टेट कंपनियां अपनी क्षमता से ज्यादा भारी कर्ज में डूबी हुई थीं और उनके पास आगे बढऩे का कोई रास्ता शेष न बचा था। जहां तक मेरा सवाल है, झुहाई में मैंने जो फ्लैट खरीदा था, वह आज तक बना ही नहीं है। डेवलपर के पास पैसा खत्म हो गया। बैंक और दूसरे स्रोतों से मिलने वाली फंडिंग बंद हो गई और मेरी जमा की गई पूरी रकम भी उसी संकट में फंस गई। लेकिन असली कहानी कर्ज से भी बड़ी है। कर्ज के इस संकट के नीचे एक और गहरी कहानी छिपी हुई है और वह है जनसंख्या की कहानी। यही बात हमें बताती है कि यह संकट केवल बाजार की अस्थायी मंदी नहीं, बल्कि शायद रियल एस्टेट बाजार के एक नए और कठिन दौर की शुरुआत है। चीन की आबादी 2021 में अपने चरम पर पहुंच गई थी। उसके बाद से हर साल जन्म वालों की तुलना में मरने वालों की संख्या ज्यादा रही है पर समस्या केवल आबादी में गिरावट की नहीं है। चीन में मकानों की मांग बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण-शहरों की ओर लोगों का पलायन भी अब अपनी सीमा पर पहुंच चुका है। साल 2000 में चीन की केवल 36 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती थी। आज यह आंकड़ा करीब 69 प्रतिशत है।

मैं लगातार एक जैसी कहानियां सुन रहा हूं- एक युवा दंपती है। दोनों नौकरी करते हैं और दोनों ने इस भरोसे मकान का भारी कर्ज लिया कि दोनों की तनख्वाह हमेशा आती रहेगी और वे किस्त चुकाते रहेंगे। फिर अचानक उनमें से एक की नौकरी चली जाती है। एकल आमदनी की वजह से उन्हें मकान बेचना पड़ा। उन्हें ऐसी सच्चाई का सामना करना पड़ता है, जिसका अनुभव चीन में पहले किसी ने नहीं किया था। मकान की कीमत इतनी गिर चुकी होती है कि उसे बेचने से मिलने वाली रकम बैंक का पूरा कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं होती। इसे ही 'नेगेटिव इक्विटी' कहा जाता है- यानी संपत्ति की बाजार कीमत उसके ऊपर बकाया कर्ज से भी कम हो जाना। चीनी रियल एस्टेट बाजार में कुछ समय पहले तक यह शब्द लगभग सुनाई ही नहीं देता था लेकिन आज यह 30-32 साल की उम्र वाले तमाम लोगों के लिए हकीकत बन चुका है। मुझे अब भी नहीं पता कि झुहाई वाला फ्लैट कब तैयार होगा और तब उसकी कीमत क्या होगी।

(किंग्सवे ग्लोबल के संस्थापक एवं सीईओ)