आजादी की वह कीमत, जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए
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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : जीवन की सार्थकता देने में है। लेने वाला अभावग्रस्त ही रहता है। एक बीज को देखो! जिस दिन उसने देने का संकल्प किया, जमीन में गड़ गया। पेड़ बन गया। खुद को भूल गया। कौन फल खाएगा, कौन घोंसले बनाएगा, उसे क्या? अपनी चिन्ता करता तो पेड़ नहीं बन पाता।