ओपिनियन

सख्त कार्रवाई हो

आग लगने पर कुंआ खोदने की प्रवृत्ति ने ही देश का बंटाधार कर रखा है। कितना भी बड़ा काण्ड क्यों न हो जाए, जिम्मेदारी लेने को कोई सामने आता ही नहीं।
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Aug 08, 2018
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पहले मुजफ्फरपुर, फिर देवरिया और कल न जाने कौनसा शहर रक्षकों के ही भक्षक बनने की दास्तां सुनाता मिल जाए। मुजफ्फरपुर और देवरिया के ‘शेल्टर होम’ में बेसहारा बच्चियों के साथ हुई अमानवीय हरकतें हमारे शासन और प्रशासन के आंख मूंदकर बैठे रहने की जीती-जागती कहानी से कुछ कम नहीं। दोनों शेल्टर होम की काली करतूतें देश के सामने आईं तो संसद भी गूंज उठी। देश के गृहमंत्री से लेकर बिहार और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भी दोषियों को सख्त सजा दिलाने की वकालत करते नजर आए। लेकिन सभ्य समाज को शर्मसार कर देने वाली इतनी बड़ी घटना के लिए क्या नीतीश कुमार और योगी आदित्यनाथ को दोषी नहीं माना जाए? बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कहते हैं कि मुजफ्फरपुर की घटना में कोई मंत्री दोषी पाया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। नीतीश बताएं कि मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों के साथ लम्बे समय से बलात्कार हो रहा था तो सम्बन्धित मंत्री-अधिकारी क्या कर रहे थे?

क्या कभी किसी ने ऐसे संरक्षण गृहों का आकस्मिक निरीक्षण कर असलियत जानने की कोशिश की? देवरिया में तो एक दस साल की बच्ची ने पुलिस को शेल्टर होम की हकीकत से रुबरु करा दिया तो २४ बच्चियां नरक से निकाल ली गईं। वरना प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों और अधिकारियों को तो इस तरफ देखने की फुर्सत ही नहीं है। देवरिया के इस शेल्टर होम को अनियमितताओं के चलते साल भर पहले बंद करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन संरक्षण गृह फिर भी चल रहा था। घोर आश्चर्य! दोनों राज्य सरकारें अपने-अपने राज्य में सुशासन का दावा करते नहीं थकती। क्या यही है इनका सुशासन? शेल्टर होम से बच्चियों को विदेश भेजने की बात भी सामने आ रही है। जाहिर है ये किसी बड़ी साजिश के बिना नहीं हो सकता। मामला सामने आया तो दोनों सरकारों ने जांच के आदेश दे डाले। पूरे राज्य में चल रहे बाल और महिला संरक्षण गृहों के निरीक्षण के निर्देश भी आनन-फानन में जारी हो गए। ऐसे गृहों का नियमित रूप से निरीक्षण होता रहे तो ऐसी दिल दहलाने वाली घटनाएं सामने ही नहीं आएं। आग लगने पर कुंआ खोदने की प्रवृत्ति ने ही देश का बंटाधार कर रखा है। कितना भी बड़ा काण्ड क्यों न हो जाए, जिम्मेदारी लेने को कोई सामने आता ही नहीं।

अधिकार सबको चाहिए लेकिन जवाबदेही से हर कोई बचना चाहता है। जरूरत इसे बदलने की है। अन्यथा कल फिर कोई मुजफ्फरपुर और देवरिया दोहराया जाएगा और सप्ताह-दस दिन हल्ला मचकर फिर सब शान्त हो जाएगा। देश की शीर्ष अदालत ने भी दोनों जगह बच्चियों के साथ हुए बलात्कार पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने तल्ख अंदाज में कहा कि देश में लेफ्ट हो या राइट या फिर सेंटर, सब जगह बलात्कार हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें ‘शेल्टर होम’ को आर्थिक सहायता मुहैया तो कराती हैं लेकिन कभी निरीक्षण की जरूरत नहीं समझती। लगता है कि ऐसी गतिविधियां राज्य प्रायोजित होती हैं। टिप्पणी जितनी सख्त है, उतनी ही सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

Published on:
08 Aug 2018 12:56 pm