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PATRIKA PODCAST : दिशाहीनता के दौर में सही दृष्टिकोण

वर्तमान जीवनशैली में भोग ही प्रधान हो गया है। सब ओर अराजकता एवं अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। नई पीढ़ी आधुनिकता की अंधी दौड़ में जीवन मूल्यों, संस्कारों और अध्यात्म के मार्ग को छोडक़र पाश्चात्य जीवन शैली को अपनाने लगी है।
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Updated: 11 Sep 2026, 3:21 PM IST
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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : भोगवादी दृष्टि जीवन को निरन्तर अशांत व काल्पनिक बनाए रखती है। व्यक्ति भोगवृत्तियों में लिप्त होता चला जाता है। उसके मन में कभी संतोष का भाव आता ही नहीं। मन चंचल है। वह एक कामना पूर्ति के साथ ही पुन: नई कामना की ओर दौडऩे लगता है। जबकि जिसकी दृष्टि योग की ओर लगी रहती है वह जीवन में हर क्षण संतोष का अनुभव करता हुआ आनन्द को प्राप्त होता है। स्वार्थ को छोडक़र वह परमार्थ का मार्ग अपनाता है।

Updated on:
11 Sep 2026, 3:21 PM IST
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