पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं। प्रस्तुत हैं पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं
ग्रामीण खेल ढांचे को मजबूत करने की जरूरत
गांव और कस्बों में खेल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए जाएँ, स्थानीय कोच नियुक्त हों और पंचायत स्तर पर खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ। बहुउद्देशीय खेल मैदान, प्रतिभा खोज अभियान, स्कूलों में खेल का एकीकरण और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना भी आवश्यक है, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर मिल सके।
- शिवजी लाल मीना, जयपुर
खेल को अनिवार्य विषय बनाया जाए
सरकारी व निजी स्कूलों तथा कॉलेजों में खेल को अलग विषय और नियमित पीरियड के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएँ हों, खेल क्लब बनाए जाएँ, खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि व रोजगार के अवसर मिलें तथा महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाई जाए।
- मुकेश सोनी, जयपुर
स्कूल स्तर से ही प्रतिभा संवर्धन
गांवों-कस्बों में खेल मैदान, प्रशिक्षित कोच और नियमित खेल पीरियड अनिवार्य किए जाएँ। स्थानीय प्रतियोगिताएँ आयोजित हों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति व उपकरण सहायता मिले। पंचायत और समुदाय की भागीदारी तथा डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण भी उपयोगी हो सकता है।
- सक्षम स्वामी, झालावाड़
ब्लॉक स्तर तक अभ्यास केंद्र जरूरी
पंचायत स्तर पर मैदान विकसित किए जाएँ और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के तहत उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ। स्थानीय कोच, ग्रामीण प्रतियोगिताएँ और ब्लॉक स्तर पर अभ्यास केंद्र स्थापित हों। पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देकर मेधावी खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए।
- डॉ. मुकेश भटनागर, भिलाई, छत्तीसगढ़
बचपन से पहचान और मार्गदर्शन आवश्यक
सभी स्कूलों में खेल मैदान और शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति हो। छोटी कक्षाओं से ही बच्चों की रुचि पहचानकर उसी दिशा में प्रशिक्षण दिया जाए और अभिभावकों को भी प्रोत्साहित किया जाए, ताकि खेल को करियर के रूप में स्वीकार्यता मिले।
- चंद्रशेखर प्रजापत, जोधपुर
ग्रामीण खेल महोत्सव से बढ़ेगा आत्मविश्वास
हर गांव में “खेलो इंडिया ग्रामीण महोत्सव” जैसे आयोजन होने चाहिए। इससे उन बच्चों और युवाओं को भी अवसर मिलेगा जो अंतर्मुखी हैं या जिन्हें मंच नहीं मिल पाता। ऐसे आयोजन प्रतिभा को सामने लाने में सहायक होंगे।
- प्रियव्रत चारण ‘लव’, जोधपुर
छात्रवृत्ति और पुरस्कार का प्रावधान हो
स्कूली स्तर पर खिलाड़ियों की पहचान की जाए। खेल ढांचे का विकास, कोचिंग की व्यवस्था, आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता, पुरस्कार और छात्रवृत्ति दी जाए तथा स्थानीय खेलों को भी शामिल किया जाए।
- दामोदर शर्मा, लूणकरणसर, राजस्थान
समाज और सरकार की साझी जिम्मेदारी
स्कूलों में मैदान, उपकरण और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध हों तथा नियमित प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँ। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति और पोषण सहायता मिले। अभिभावकों को भी खेल के महत्व के प्रति जागरूक करना जरूरी है, ताकि बच्चों को प्रोत्साहन मिल सके।
- नरेश सुथार, सरदारशहर
पाठ्यक्रम में खेल शिक्षा अनिवार्य हो
विद्यालयों के पाठ्यक्रम में खेल शिक्षा को विषय के रूप में शामिल किया जाए। प्रशिक्षकों द्वारा खेलों का प्रशिक्षण दिया जाए, आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए और जागरूकता अभियानों के माध्यम से अभिभावकों को खेलों के लाभ बताए जाएँ।
- विभा गुप्ता, बैंगलूरु
खेल को कॅरियर विकल्प के रूप में स्वीकारें
स्कूलों में नियमित खेल पीरियड, मैदान, उपकरण और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराए जाएँ। पंचायत व नगर निकाय प्रतियोगिताएँ आयोजित करें और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति व मार्गदर्शन दिया जाए। इससे खेल को कॅरियर के रूप में स्वीकार करने की सोच विकसित होगी।
- संजय माकोड़े, बैतूल
स्थानीय समाज की भूमिका अहम
गांव-कस्बों में शिक्षा और खेल को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि जिम्मेदारी लें। आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें सहयोग दिया जाए, तभी ग्रामीण प्रतिभाएँ देश का नाम रोशन कर सकेंगी।
- पवन बैरवा, भीलवाड़ा
नीति और संसाधनों पर ध्यान जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में खेल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इसे शिक्षा नीति में महत्व दिया जाए। ब्लॉक स्तर पर मल्टी-स्पोर्ट केंद्र, प्रशिक्षित कोच, छात्रवृत्ति, खेल कोटा और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था हो। बेटियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन भी आवश्यक है।
- डॉ. दीपिका झंवर, जयपुर
लड़कियों के लिए सुरक्षित खेल वातावरण
ग्राम पंचायत स्तर पर मैदान और उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ तथा स्थानीय कोच नियुक्त हों। गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर प्रतियोगिताएँ आयोजित हों और लड़कियों के लिए सुरक्षित प्रशिक्षण वातावरण बनाया जाए। पूर्व खिलाड़ियों को कोच के रूप में नियुक्त करना भी प्रभावी कदम हो सकता है।
- प्रवेश भूतड़ा, सूरत
प्रतियोगिताएँ बढ़ाएँगी आत्मविश्वास
स्कूलों में खेल मैदान, प्रशिक्षित कोच और आवश्यक उपकरण उपलब्ध हों। स्थानीय स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएँ आयोजित हों और पंचायत व प्रशासन खेल अकादमियों को प्रोत्साहित करें। खेल को पढ़ाई के साथ मजबूत करियर विकल्प के रूप में स्वीकार करना समय की मांग है।
- राकेश खुडिया, श्रीगंगानगर
प्रतिभा को मंच और छात्रवृत्ति मिले
सरकार और समाज मिलकर स्कूलों में खेल मैदान, प्रशिक्षित कोच और खेल सामग्री उपलब्ध कराएँ। ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताएँ और छात्रवृत्ति योजनाएँ शुरू की जानी चाहिए।
- रूहान खान, रतलाम
राष्ट्रीय अभियानों का लाभ गांव तक पहुँचे
खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक प्रोत्साहन दिया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर मैदान, खेल सामग्री और पाठ्यक्रम में खेल शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
- सतीश उपाध्याय, मनेद्रगढ़, छत्तीसगढ़
ग्रामीण प्रतियोगिताओं से बढ़ेगा उत्साह
स्कूलों में मैदान, प्रशिक्षित कोच और खेल सामग्री उपलब्ध हो। नियमित प्रतियोगिताएँ और छात्रवृत्ति योजनाएँ शुरू कर ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए।
- रंजीत सिंह, रतलाम, मध्य प्रदेश
प्रतिदिन खेल का समय तय हो
ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान सुरक्षित रखे जाएँ, खेल शिक्षकों की नियुक्ति हो और पढ़ाई के साथ खेल का समय अनिवार्य किया जाए। सभी शासकीय स्कूलों में खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाए और समय-समय पर प्रतियोगिताएँ आयोजित कर खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जाए।
- हुकुम सिंह पंवार, इंदौर
पूर्व खिलाड़ियों का अनुभव काम आए
विद्यालय स्तर पर पूर्व खिलाड़ी और अभिभावकों को खेल गतिविधियों से जोड़ा जाए। ब्लॉक, जिला और राज्य स्तरीय खिलाड़ियों से बच्चों का संवाद कराया जाए और उपलब्धियों पर पारितोषिक देकर प्रोत्साहित किया जाए, जिससे खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी।
- दिनेश बामणिया, पाली, राजस्थान
बुनियादी सुविधाएँ सबसे पहली जरूरत
गांवों में खेल मैदान, उपकरण और कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। ग्रामीण प्रतियोगिताएँ और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रतिभा खोज कर खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। खेल का महत्व जन-जन तक पहुँचाना भी आवश्यक है।
- निर्मला वशिष्ठ, राजगढ़, अलवर
पुरस्कार से बढ़ता है उत्साह
स्कूलों में खेल का नियमित पीरियड और कुशल खेल शिक्षक होना चाहिए। समय-समय पर प्रतियोगिताएँ आयोजित कर प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाए, जिससे बच्चों का उत्साह बढ़ेगा।
- सरोज जैन, खंडवा, मध्य प्रदेश
कोच और खेल सामग्री की उपलब्धता जरूरी
गांव-कस्बों में खेल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मैदान, पर्याप्त खेल सामग्री और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराना आवश्यक है। खेल प्रेमियों और स्थानीय सहयोग से ही खेल गतिविधियाँ निरंतर चल सकेंगी।
- आनंद सिंह राजावत, देवली कला, ब्यावर, राजस्थान
जमीनी स्तर पर खेल केंद्र विकसित हों
गांवों में खेल मैदान विकसित किए जाएँ, स्थानीय कोच नियुक्त हों और उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ। खेलो इंडिया योजना के तहत केंद्र स्थापित कर ग्रामीण स्कूलों में खेलों को बढ़ावा दिया जाए तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाए।
- दीपू पाटीदार, झालावाड़
प्राथमिक स्तर से खेल संस्कार
आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्कूलों से ही बच्चों को खेलों के प्रति जागरूक किया जाए। ग्रामीण खेल महोत्सव जैसे कार्यक्रम जारी रहें, ताकि बच्चों और युवाओं में रुचि बढ़े और गांवों से नई प्रतिभाएँ सामने आएँ।
- शक्ति सिंह चौहान, जोधपुर