बारिश के पूरे सीजन में बिहार को 1,137 मिमी बारिश मिलनी चाहिए, लेकिन अब तक इसका आधा भी नहीं हो पाया है।
बिहार में इस साल मॉनसून ने फिर कहर बरपाया है। राज्य के कुछ जिलों में बारिश की भारी कमी है, वहीं कुछ इलाकों में नदियां उफान पर हैं, जिससे बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगस्त तक राज्य में केवल 554 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 782 मिमी है, यानी 228 मिमी कम पानी गिरा। पूरे सीजन में बिहार को 1,137 मिमी बारिश मिलनी चाहिए, लेकिन अब तक इसका आधा भी नहीं हो पाया है। नतीजतन, 12 जिले सूखे की चपेट में हैं जबकि 26 जिलों में बाढ़ का संकट है। 12 लाख से ज्यादा लोग बेघर होकर सड़कों और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
मौसम वैज्ञानिकों ने इसके 3 बड़े कारण बताए:
मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में सामान्य से ज्यादा (300 मिमी से ऊपर) बारिश हो सकती है, खासकर 11 से 18 सितंबर के बीच, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि सालाना बारिश का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।
नेपाल में भारी बारिश से गंगा, कोसी और गंडक नदियां उफान पर हैं। इससे भागलपुर में गंगा के पानी से बरारी, आदमपुर, नाथनगर और तातारपुर डूबे। TMBU यूनिवर्सिटी कैंपस तक में पानी घुस गया। वहीं मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से महज 6 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। चंडीका स्थान और कष्ठरानी घाट डूब गए हैं और छह ब्लॉक जलमग्न हैं। जहानाबाद की बात करें तो फल्गु नदी का बांध टूट गया है, जिससे 50 गांव जलमग्न हो गए हैं। मत्स्य पालकों को 50 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है और धान की फसल तबाह हो गई है।
बारिश की कमी से खरीफ फसलें बर्बाद हो रही हैं और भूजल संकट गहराने की आशंका है। दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित इलाके राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।